
Raipur Bank Crisis: छत्तीसगढ़ के सहकारी बैंकों में कर्मचारियों की भारी कमी हो गई है। इससे कर्मचारियों पर वर्कलोड तो बढ़ा ही है, साथ में आम लोगों के काम भी समय पर नहीं हो पा रहे हैं। जो काम एक ही दिन में हो जाना चाहिए, उसमें भी एक-दो दिन लग रहे हैं। ग्राहकों की केवायसी, एटीएम कार्ड वितरण, लोन वितरण से लेकर बीमा संबंधी कामकाज कई दिन लग रहे हैं, जिससे आम लोग खासे परेशान हैं।
सहकारी बैंक की कुल 70 ब्रांच हैं, जहां एक ब्रांच में कम से कम 7 कर्मचारी होने चाहिए, लेकिन वर्तमान में अधिकांश शाखाएं केवल 2 से 3 कर्मचारियों के भरोसे चल रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, एक समय सहकारी बैंकों में करीब 1,000 कर्मचारी-अधिकारी हुआ करते थे, जो अब घटकर लगभग 400 ही बचे हैं।
कर्मचारियों की कमी का असर केवल विभागीय कामकाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे आम लोगों को मिलने वाली जरूरी सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। बैंक शाखाओं में भीड़ बढ़ने पर खाताधारकों को नकद जमा करने और निकालने, पासबुक अपडेट कराने, खाते से जुड़ी जानकारी लेने, चेक भुगतान कराने, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से संबंधित काम और कृषि ऋण की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
पासबुक अपडेट कराने, खाते से जुड़ी जानकारी लेने, चेक भुगतान करने, तथा किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से संबंधित काम और कृषि ऋण की प्रक्रिया पूरी कराने जैसे सभी जरूरी कामों के लिए अब ग्राहकों को अधिक समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि लोन की जो प्रक्रिया पहले मात्र 2 से 3 दिनों में पूरी हो जाती थी, उसमें अब एक से डेढ़ सप्ताह तक का समय लग रहा है।
सहकारी बैंकों में अनुकंपा नियुक्ति के 35 मामले लंबे समय से लंबित हैं। पिछले कई सालों से हितग्राही अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इसके अलावा, दूसरी नई भर्तियां भी कई साल से पूरी तरह बंद हैं। इन तमाम मुद्दों को लेकर कर्मचारी संगठनों में लगातार नाराजगी बनी हुई है और वे अपनी मांगें उठा रहे हैं।
नवंबर से शुरू होने वाले धान खरीदी अभियान के दौरान सहकारी समितियों और बैंकों के बीच आपसी समन्वय की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाएगी। इस दौरान किसानों के भुगतान, बैंक खातों में राशि जमा होने की स्थिति, ऋण वसूली और खरीफ सीजन से जुड़े लेन-देन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को समय पर पूरा करना बेहद जरूरी होगा।
हालांकि, कर्मचारियों की भारी कमी के चलते इन सभी कार्यों का अतिरिक्त बोझ मौजूदा स्टाफ पर पड़ना तय है। इसके चलते भुगतान संबंधी शिकायतों के त्वरित निराकरण और किसानों को समय पर सुचारू बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने में बड़ी बाधा आने की आशंका बनी हुई है।