रायपुर

संसदीय सचिवों की विधायकी गई तो बढ़ सकती हैं छत्तीसगढ़ सरकार की मुश्किलें

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायकों की सदस्यता शून्य होने का असर छत्तीसगढ़ में भी पड़ सकता है।परिणाम यह होगा कि समय से पहले ही सरकार गिर जाएगी।

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Jan 20, 2018
CG govt to be in danger if parliamentary secretaries disqualified

रायपुर . लाभ का पद के प्रश्न पर दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायकों की सदस्यता शून्य होने का असर छत्तीसगढ़ में भी पड़ सकता है। भारत निर्वाचन आयोग ने उसी फॉर्मूले को छत्तीसगढ़ विधानसभा में लागू किया तो भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार अल्पमत में आ जाएगी।

लाभ के पद का मामला

परिणाम यह होगा कि समय से पहले ही सरकार गिर जाएगी। प्रदेश की 90 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 49 विधायक हैं। अगर संसदीय सचिव बनाए गए 11 नेताओं की सदस्यता जाती है, तो सदन में भाजपा के केवल 38 विधायक बचेंगे। यह संख्या विपक्षी कांग्रेस की सदस्य संख्या 39 से एक कम होगी।

हालांकि 11 विधायकों के अयोग्य घोषित होने के बाद विधानसभा में सदस्यों की संख्या 79 गिनी जाएगी। बहुमत साबित करने के लिए भाजपा को 40 विधायकों का साथ चाहिए होगा। चुनावी वर्ष में जिनका मिलना संभव नहीं दिख रहा है। कांग्रेस विधायक दल के नेता टीएस सिंहदेव का कहना है, उनकी पार्टी चाहती है, मुख्य निर्वाचन आयुक्त सोमवार को अपने पद से विदा होने से पूर्व छत्तीसगढ़ के संसदीय सचिवों का भी फैसला करते जाएं।

संसदीय सचिवों की सुविधाएं
मासिक वेतन 73 हजार (11 अतिरिक्त भत्ता ) कुल खर्च 25 लाख मंत्रालय से अलग, डी और ई टाइप कमरे, मंत्रालय में अलग कमरा लाल बत्ती वाली गाड़ी अलग ऑफिस और टेलीफोन सरकारी डीजल राजकोष से फ्री सुरक्षा के लिए 1 से चार गार्ड बंगले में 6 चौकीदार और दो रसोइये

'लालबत्ती' के लिए बनाए गए हैं संसदीय सचिव
संयुक्त मध्य प्रदेश में संसदीय सचिव परंपरा की शुरुआत असंतुष्ट विधायकों को मंत्री जैसा रसूख देकर साधने की गरज से हुई थी। उसके लिए 1967 मेंं वहां एक कानून भी बना था। छत्तीसगढ़ में असंतुष्टों जैसी कोई बात नहीं होने के बावजूद लालबत्ती के लिए संसदीय सचिव बनाए जाते रहे। भाजपा सरकार ने दो बार में 11 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया। अधिकतर को कैबिनेट अथवा राज्य मंत्री का दर्जा मिला हुआ है।

Published on:
20 Jan 2018 09:49 am
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