रायपुर

CG Medical Hostel: 150 से ज्यादा छात्रों को पड़ी हॉस्टल की जरूरत, मकान खोज रहा कॉलेज प्रबंधन

CG Medical Hostel:: रायपुर में पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में कॉलेज प्रबंधन मकान खोज रहा है, लेकिन मिल नहीं रहा है। अभी छात्र एक किराए के कमरे के लिए 5 से 8 हजार रुपए तक चुका रहे हैं। इससे उन्हें परेशानी हो रही है।

2 min read
Oct 19, 2024

CG Medical Hostel: छत्तीसगढ़ के रायपुर में पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में कॉलेज प्रबंधन मकान खोज रहा है, लेकिन मिल नहीं रहा है। फुंडहर में कामकाजी महिलाओं के लिए बने हॉस्टल को देखने भी गए थे, लेकिन वहां एक भी कमरा खाली नहीं होने से प्रबंधन को निराशा हाथ लगी है। अब देवेंद्रनगर के आसपास हॉस्टल देख रहे हैं ताकि छात्रों को कॉलेज आने-जाने में परेशानी न हो। अभी छात्र एक किराए के कमरे के लिए 5 से 8 हजार रुपए तक चुका रहे हैं। इससे उन्हें परेशानी हो रही है।

CG Medical Hostel: डेढ़ साल बाद भी डीएमई कार्यालय में शिफ्ट नहीं कर पाए हॉस्टल

CG Medical Hostel: पुराने स्वास्थ्य संचालनालय कार्यालय को हॉस्टल बनाना था, लेकिन डेढ़ साल बाद यह हॉस्टल का रूप नहीं ले सका है। डीएमई कार्यालय भी डेढ़ साल पहले नवा रायपुर शिफ्ट हो गया है। वहीं आयुष्मान भारत योजना का स्टेट नोडल एजेंसी कार्यालय भी 8 माह पहले नवा रायपुर चला गया है।

CG Medical Hostel: इस कार्यालय में 20 के आसपास बड़े कमरे हैं, जो हॉस्टल बनाने के लिए पर्याप्त है। जब डीएमई कार्यालय शिफ्ट हुआ, तब इसे हॉस्टल बनाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन यह अधूरी ही है। वर्तमान में इस बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर में पैरामेडिकल कोर्स के डायरेक्टर व फर्स्ट फ्लोर में नर्सिंग काउंसिल रजिस्ट्रार का कार्यालय है। इन दोनों कार्यालयों को आसपास शिफ्ट कर हॉस्टल बनाने की योजना थी, जो अधर में है।

डीकेएस में एमसीएच के छात्र अस्पताल में ही

दूसरी ओर डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एमसीएच के छात्रों के लिए भी हॉस्टल नहीं है। ये छात्र पेइंग वार्ड को हॉस्टल की तरह उपयोग कर रहे हैं। प्रबंधन ने इसके लिए मंजूरी दी है। प्रबंधन का कहना है कि हॉस्टल नहीं होने के कारण ऐसा करना पड़ा है। राज्य सरकार ने फरवरी में बजट में हॉस्टल के लिए एक करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। हालांकि इसके बनने में अभी देरी है। टेंडर प्रक्रिया से लेकर बिल्डिंग निर्माण में कम से कम एक से डेढ़ साल लग सकता है। तब तक छात्रों को पेइंग वार्ड को ही हॉस्टल के रूप में उपयोग करना होगा।

नेहरू मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. विवेक चौधरी ने कहा की हॉस्टल के लिए मकान खोज रहे हैं। फुंडहर गए थे, लेकिन वहां हॉस्टल पूरी तरह पैक है। कॉलेज के आसपास मकान देख रहे हैं, जिससे छात्रों को कॉलेज आने-जाने में सुविधा हो। किराया प्रबंधन चुकाएगा। बस की व्यवस्था भी की जाएगी।

मेडिकल कॉलेज कैंपस में दो पुराने हॉस्टल कंडम हो चुके हैं। इसे तोड़कर नया बनाया जा रहा है। इसके पूरा बनने में अभी समय है। ये हॉस्टल 100-100 सीटर हैं। इसके कारण एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं को देवेंद्रनगर में महंगे में किराए में रहना पड़ रहा है। बताया जाता है कि एक कमरे में दो से तीन छात्र रहते हैं। सुविधा के अनुसार प्रति छात्र 5 से 8 हजार रुपए प्रति माह का किराया है। यह गरीब वर्ग के छात्रों के लिए काफी महंगा है। कॉलेज में एमबीबीएस की 230 सीटें हैं। इनमें 60 से 70 फीसदी यानी 138 से 150 छात्रों को हॉस्टल की जरूरत पड़ती है।

Published on:
19 Oct 2024 11:25 am
Also Read
View All

अगली खबर