
रायपुर. परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई रायपुर की दक्षिण विधानसभा सीट को भाजपा की मजबूत सीटों में गिना जाता है। इसके बावजूद वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां से चुनाव लड़ने वालों की संख्या सर्वाधिक थी। यहां प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों सहित 39 उम्मीदवारों ने अपनी ताल ठोंकी थीं। दूसरे नम्बर पर बिलासपुर जिले की कोटा विधानसभा सीट थी। यहां से 20 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था।
2013 के विधानसभा चुनाव पर नजर डाले तो प्रत्याशियों की संख्या में मामले में दुर्ग जिला भी शीर्ष पर रहा है। रायपुर दक्षिण और कोटा विधानसभा के बाद दुर्ग जिले की तीन सीट भिलाई नगर, वैशाली नगर और दुर्ग शहर में 19-19 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे थे। इन पांचों विधानसभा में सर्वाधिक मतदान कोटा में 77.31 फीसदी रहा था। जबकि रायपुर दक्षिण में 66.87 फीसदी, दुर्ग शहर में 68.06 फीसदी, भिलाई नगर में 64.06 फीसदी और वैशालीनगर में 59.91 फीसदी मतदान हुआ था।
कोंटा में सबसे कम उम्मीदवार
माओवाद प्रभावित क्षेत्र कोंटा विधानसभा में उम्मीदवारों की संख्या सबसे कम रही है। राज्य निर्माण के बाद हुए तीनों विधानसभाओं में सबसे कम प्रत्याशी इसी विधानसभा से चुनाव मैदान में उतरे हैं। 2013 में यहां से मात्र 5 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था। सरायपाली और अंतागढ़ में छह-छह प्रत्याशी थे। जबकि बैकुण्ठपुर, लुण्ड्रा, रामपुर, कोण्डागांव, नारायणपुर, चित्रकोट, दंतेवाड़ा और बीजापुर में 7-7 उम्मीदवारों ने अपना भाग्य आजमाया था।
संयुक्त मध्यप्रदेश में 1990 में सर्वाधिक उम्मीदवार
संयुक्त मध्यप्रदेश के समय 1990 में हुआ विधानसभा चुनाव सबसे अहम था। उस दौरान में मध्यप्रदेश की 320 विधानसभा सीटों के लिए 4 हजार 215 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे थे। इनमें से 3 हजार 530 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। इस चुनाव में रीवा, भोपाल और भिलाई के उम्मीदवारों ने सबकों आश्चर्य में डाल दिया है। रीवा और साउथ भोपाल की विधानसभा सीटों में 49-49 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे थे। वहीं छत्तीसगढ़ के हिस्से में आने वाली भिलाई विधानसभा में 36 उम्मीदवारों ने अपना भाग्य आजमाया था। वहीं रायपुर शहर और कटघोरा में 31-31 और राजनांदगांव में 30 उम्मीदवारों ने विधानसभा का चुनाव लड़ा था।
कम-ज्यादा भी हुए वोटों के प्रतिशत
आजादी के बाद हुए अब तक के विधानसभा चुनाव में वोटों को प्रतिशत कभी कम तो कभी ज्यादा होते रहे हैं। राज्य निर्माण के बाद प्रदेश में भी यही स्थिति बनी रही। राज्य बनने के बाद 2003 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में 71.30 फीसदी मतदात हुआ। इसके बाद 2008 के चुनाव में मतदान में 0.79 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि 2013 के चुनाव में मतदान के प्रतिशत ने लंबी छलांग लगाई और 77.15 फीसदी मतदान हुआ। वहीं संयुक्त मध्यप्रदेश के समय की बात करें, तो 1993 में सर्वाधिक 60.52 फीसदी तक मतदान हुआ था।