6 सितंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Jhiram Ghati: NIA के फैसले पर सियासी संग्राम शुरू! कांग्रेस बोली- न्याय नहीं हुआ; BJP ने कहा- पांच साल तक सबूत क्यों नहीं दिए?

Jhiram Ghati Massacre: झीरम कांड में NIA कोर्ट के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने फैसले पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही, जबकि भाजपा ने कांग्रेस के दावों और सबूतों पर सवाल उठाए हैं।
3 min read
Google source verification
Jhiram Ghati

Jhiram Ghati: कांग्रेस ने कहा- न्याय नहीं हुआ(photo-patrika)

Jhiram Ghati: छत्तीसगढ़ के झीरम कांड मामले में NIA कोर्ट के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत गरमा गई है। फैसले को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं। कांग्रेस ने NIA के फैसले को खानापूर्ति और लीपापोती करार देते हुए जांच पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने कहा है कि मामले में न्याय के लिए आगे कानूनी लड़ाई जारी रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जाएगा। वहीं, भाजपा ने NIA कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कांग्रेस नेताओं के पुराने दावों और सबूतों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

Jhiram Ghati Case: कांग्रेस ने कहा- न्याय नहीं हुआ, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे

प्रदेश कांग्रेस ने NIA कोर्ट के फैसले पर असंतोष जताया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि झीरम हमले के पीछे जिन लोगों ने साजिश रची और हमले की योजना बनाई, उन तक जांच नहीं पहुंची। पार्टी का आरोप है कि मामले में वास्तविक तथ्यों को सामने लाने के बजाय केवल औपचारिक कार्रवाई की गई।कांग्रेस ने संकेत दिया है कि कानून विशेषज्ञों से चर्चा के बाद फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जाएगा।

दीपक बैज बोले- राजनीतिक षड्यंत्र और सुपारी किलिंग थी

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि बस्तर के लोग जानते हैं कि कांग्रेस नेताओं और जवानों की हत्या राजनीतिक षड्यंत्र और सुपारी किलिंग थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता हासिल करने के लिए हत्याएं कराई गईं। बैज ने कहा कि जिन 10 लोगों को आरोपी बनाया गया, वे बड़े नक्सली नहीं थे। उनके मुताबिक हमले की योजना बनाने वाले बड़े नक्सली नेताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने NIA की जांच पर सवाल उठाते हुए इसे लीपापोती करार दिया।

मलकीत सिंह गेंदु बोले- शुरू से रहा सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

कांग्रेस संगठन महामंत्री मलकीत सिंह गेंदु ने खुद को घटना का प्रत्यक्षदर्शी बताते हुए कहा कि उस समय कांग्रेस की रैली को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि सुकमा में आयोजित सभा को लेकर भी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल रहे थे। गेंदु ने कहा कि शुरुआत से ही घटना को लेकर संशय रहा है। उनका कहना है कि कांग्रेस को न्याय नहीं मिला है और अब कानून विशेषज्ञों से चर्चा के बाद कोर्ट का रुख किया जाएगा।

तूलिका कर्मा ने कहा- प्रत्यक्ष मौजूद लोगों से नहीं हुई पूछताछ

कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा की बेटी तूलिका कर्मा ने भी NIA की जांच पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि घटना के समय जो लोग मौके पर मौजूद थे, उनसे ही पर्याप्त पूछताछ नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि न्याय के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है। तूलिका कर्मा ने कहा कि घटना के समय और वर्तमान में प्रदेश में भाजपा की सरकार होने का हवाला देते हुए जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

भाजपा ने फैसले का किया स्वागत

कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा ने NIA कोर्ट के फैसले को स्वागत योग्य बताते हुए कहा कि अदालत के फैसले से मामले में स्थिति स्पष्ट हुई है। पार्टी ने कांग्रेस नेताओं के पुराने बयानों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

संतोष पांडेय बोले- पांच साल तक सबूत क्यों नहीं दिए?

भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं सांसद संतोष पांडेय ने कहा कि NIA कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है और इससे दूध का दूध, पानी का पानी हो गया है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से सवाल किया कि जब कांग्रेस सरकार के दौरान कुछ नेता झीरम कांड के सबूत अपने पास होने की बात कहते थे, तो उन्होंने पांच साल तक अदालत के सामने वे सबूत क्यों पेश नहीं किए। पांडेय ने आरोप लगाया कि कांग्रेस हर फैसले का विरोध करने की राजनीति करती है।

फैसले के बाद फिर आमने-सामने आई दोनों पार्टियां

झीरम कांड का मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में लंबे समय से संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। NIA कोर्ट के फैसले के बाद एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। कांग्रेस जहां जांच और फैसले पर सवाल उठाते हुए आगे कानूनी लड़ाई की बात कर रही है, वहीं भाजपा फैसले का समर्थन करते हुए कांग्रेस के पुराने दावों पर जवाब मांग रही है।