परसा कोल ब्लॉक (Coal Block) के आवंटन को लेकर राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) की चिट्ठी के बाद आदिवासी एकजुट होने शुरू हो गए हैं। गांव के प्रभावित ग्रामीण सांकेतिक विरोध प्रदर्शन करेंगे।
रायपुर. परसा कोल ब्लॉक के आवंटन को लेकर राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) की चिट्ठी के बाद आदिवासी एकजुट होने शुरू हो गए हैं। वे इस बात से नाराज है कि आखिरी राजस्थान सरकार की ओर से लिखा पत्र मीडिया में कैसे सार्वजनिक हो गया है। उनका आरोप है कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ सरकार (Chhattisgarh Government) मिलकर परसा कोल ब्लॉक का देने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि छत्तीसगढ़ सरकार ने आश्वासन दिया था कि फर्जी ग्राम सभा मामलों की जांच की जाएगी। गांव के प्रभावित ग्रामीण सांकेतिक विरोध प्रदर्शन करेंगे। ग्रामीणों ने साफ कह दिया है कि किसी भी कीमत पर वे अपनी जमीन नहीं देंगे।
बता दें कि कोल ब्लॉक के आवंटन को लेकर हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति लंबे समय से आंदोलन कर रही है। आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता आलोक शुक्ला का कहना है, कोल ब्लॉक के विरोध में ग्रामीण 300 किलोमीटर की पदयात्रा कर रायपुर पहुंचे थे। यहां राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई थी।
ग्रामीणों ने फर्जी ग्रामसभा कर कोल ब्लॉक के लिए अनुमति देने का आरोप लगाया था। उस समय राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि इस मामले की जांच कराई जाएगी। इस मामले में जांच का तो पता नहीं, लेकिन दवाब बनाने का खेल शुरू हो गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो कोल ब्लॉक शुरू ही नहीं हुआ है, उससे राजस्थान सरकार को कैसा संकट आ सकता है।
टीएस सिंहदेव ने दिया था समर्थन
इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने हसदेव अरण्य बचाओ आंदोलन का खुलकर समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि इस क्षेत्र में खनन पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए।
मंत्री चौबे बोले-राजस्थान सरकार ने जिस कंपनी को ठेका दिया उससे आपत्ति
मंत्री रविन्द्र चौबे ने राजस्थान के मुख्यमंत्री की ओर से सोनिया गांधी को लिखे पत्र पर कहा, इसके शिकायत के रूप में नहीं लेना चाहिए। सोनिया गांधी हम सब की नेता है। राजस्थान के मुख्यमंत्री को लगा कि कोल की आपूर्ति शीघ्र होनी चाहिए और परसा कोल ब्लॉक टू राजस्थान सरकार को आवंटित है, लेकिन राजस्थान सरकार ने कोयला उत्खनन का काम जिस कंपनी को दिया है, उसे लेकर छत्तीसगढ़ सरकार को थोड़ी आपत्ति है।
उन्होंने कहा, यदि पत्र सोनिया जी के पास पहुंच गया है, तो हमारे मुख्यमंत्री दिल्ली गए है। वे बात करेंगे और उनके निर्देश का पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा, महत्वपूर्ण यह नहीं है कि राजस्थान के पास कितना कोयला बचा है। महत्वपूर्ण यह है कि सोनिया जी को किस तरह से पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया है।
उन्होंने कहा, छत्तीसगढ़ के कोल ब्लॉक के मामले में लगातार हमारी बातें केंद्र सरकर के साथ चल रही थी। छत्तीसगढ़ में लेमरू एलीफेंट प्रोजेक्ट के कारण मामला अभी तक लंबित है। एलीफेंट कॉरिडोर पर फैसला कैबिनेट का जिसे नहीं बदला जा सकता है। राजस्थान सरकार, उत्तर प्रदेश से बिजली खरीद रही है, लेकिन कांग्रेस शासित राज्य कांग्रेस शासित राज्य को कोयला नहीं दे रहा है। इस सवाल का जवाब देते हुए रविंद्र चौबे ने कहा कि बिजली वितरण में नेशनल ग्रिड का सवाल रहता है। हम अगर अतिरिक्त बिजली पैदा करते हैं तो नेशनल ग्रिड में डाला जाता है।