
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की राजधानी में 7 जुलाई को बड़ी सभा होनी है। इसके लिए पद पर बैठे सभी नेताओं को भीड़ जुटाने के लिए अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है। इसमें कांग्रेस के विभिन्न संगठनों के प्रदेश अध्यक्ष भी शामिल है। बारिश और खेती-किसानी का समय होने की वजह से कांग्रेस के सामने भीड़ जुटाने की बड़ी चुनौती होगी। यही वजह है कि भीड़ के आधार पर हर नेता का जनाधार भी तय होगा। इसका असर संगठन विस्तार में भी दिखाई देगा। बता दें कि कांग्रेस का संगठन विस्तार लंबे समय से नहीं हुआ है। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष तो सालों से अपने पद पर बनी हुई है। कांग्रेस को उनका दूसरा विकल्प ही नहीं मिल रहा है।
कांग्रेस में शुरू से गुटबाजी हावी रही है। पिछली बार सत्ता में आने के बाद अब गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की बैठक और बयानबाजी में यह बात साफ दिखाई देती है। इसका असर संगठन के विस्तार पर भी पड़ रहा है। वरिष्ठ नेताओं में आपसी तालमेल नहीं होने से जिलाध्यक्ष के चयन के लिए पर्यवेक्षक बनाने की नौबत आ गई है। इसके बाद गुटबाजी समाप्त होने का नाम नहीं ले रही है।
जिला और ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों की रिपोर्ट पर अब पीसीसी में भी हर माह समीक्षा होगी। इस तरह से संगठन हर माह कामकाज और रिपोर्ट पर चर्चा करेगा। प्रदेश स्तरीय समीक्षा हर माह 25 से 30 तारीख के बीच होगी।
कांग्रेस पार्टी के जिम्मेदार सूत्रों का दावा है कि संगठन में पद लेकर घर बैठने वाले निष्क्रिय पदाधिकारी बाहर किए जा सकते हैं। उनके स्थान पर संगठन में नए चेहरों को मौका मिलेगा। संगठन में बिना पद के काम करने वाले कई सक्रिय कार्यकर्ता कतार में हैं, जो जिला अध्यक्ष पद के भी दावेदार हैं।