
Chhattisgarh PDS Report: छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के जरिए राशन वितरण की व्यवस्था मजबूत नजर आ रही है। केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की वर्ष 2025-26 की पहली चरण की NFSA-PMGKAY Concurrent Evaluation Report में राज्य को 99.8 प्रतिशत पूर्ण राशन वितरण के साथ बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल किया गया है। हालांकि, योजना और हितग्राहियों के अधिकारों की जानकारी के मामले में तस्वीर कमजोर है। रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में केवल 20.1 प्रतिशत हितग्राही ही प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के बारे में जानकारी रखते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ में 99.8 प्रतिशत हितग्राहियों को पूरा खाद्यान्न मिला। इससे साफ है कि राज्य में राशन की अंतिम छोर तक डिलीवरी व्यवस्था प्रभावी है। खासकर आदिवासी और भौगोलिक रूप से दुर्गम क्षेत्रों में भी खाद्यान्न वितरण की निरंतरता बनाए रखने में राज्य की स्थानीय और विकेंद्रीकृत व्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
राशन वितरण के बेहतर आंकड़ों के बावजूद हितग्राहियों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने में छत्तीसगढ़ पीछे है। रिपोर्ट में सामने आया कि राज्य में सिर्फ 20.1 प्रतिशत हितग्राही PMGKAY की जानकारी रखते हैं। यानी बड़ी संख्या में लोगों को यह पता ही नहीं है कि उन्हें मिलने वाले खाद्यान्न से जुड़ी योजना और उनके अधिकार क्या हैं। यह स्थिति बताती है कि केवल राशन पहुंचाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हितग्राहियों को योजना, पात्रता, मिलने वाले खाद्यान्न और शिकायत निवारण जैसी सुविधाओं की जानकारी देना भी जरूरी है।
डिजिटल व्यवस्था के मामले में छत्तीसगढ़ की स्थिति बेहतर है। राज्य में 97.5 प्रतिशत राशन कार्ड मोबाइल नंबर से लिंक हैं। यह राष्ट्रीय औसत 84.1 प्रतिशत से करीब 13 प्रतिशत अंक अधिक है। इस उपलब्धि के चलते छत्तीसगढ़ को 95 प्रतिशत से अधिक मोबाइल लिंकिंग वाले बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में रखा गया है। हालांकि, मोबाइल लिंकिंग के बावजूद डिजिटल सेवाओं के इस्तेमाल और उनके प्रति जागरूकता में अंतर दिखाई देता है।
PDS में पारदर्शिता को लेकर रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण कमी भी सामने आई है। छत्तीसगढ़ की करीब एक चौथाई उचित मूल्य दुकानों (FPS) में हितग्राहियों को प्रिंटेड रसीद नहीं दिए जाने की स्थिति पाई गई। इससे राशन वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और रिकॉर्ड रखने को लेकर सवाल उठते हैं। वहीं, निगरानी समितियों की मौजूदगी के मामले में राज्य की स्थिति बेहतर बताई गई है। 95 प्रतिशत से अधिक FPS संचालकों ने अपनी दुकान पर निगरानी समिति होने की जानकारी दी।
रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ की 15 प्रतिशत FPS दुकानें उच्च अनुपालन, 79 प्रतिशत मध्यम अनुपालन और 6 प्रतिशत कम अनुपालन वाली श्रेणी में हैं। इसका मतलब है कि अधिकांश राशन दुकानें न्यूनतम मानकों को पूरा कर रही हैं, लेकिन उन्हें बेहतर बुनियादी ढांचे तक ले जाने की गुंजाइश बनी हुई है। डिस्प्ले बोर्ड के मामले में 64 प्रतिशत FPS में उच्च अनुपालन पाया गया, जबकि 12 प्रतिशत में मध्यम और 24 प्रतिशत दुकानों में स्थिति खराब रही।
रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में उचित मूल्य दुकान संचालकों को औसतन 9,370 रुपए मासिक कमीशन मिलता है। यह राष्ट्रीय औसत 8,967 रुपए से अधिक है। रिपोर्ट में माना गया है कि राशन दुकानों की आर्थिक स्थिति का सीधा असर उनकी सेवाओं, डिजिटल व्यवस्था और नियमित खाद्यान्न वितरण पर पड़ता है। राष्ट्रीय स्तर पर सिर्फ 34 प्रतिशत FPS संचालकों ने अपनी दुकान को आर्थिक रूप से टिकाऊ माना है।
रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ के विकेंद्रीकृत खरीदी, स्थानीय वितरण मॉडल और समुदाय आधारित संचालन व्यवस्था को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। इन व्यवस्थाओं ने राज्य के आदिवासी और दुर्गम क्षेत्रों में खाद्यान्न वितरण को लगातार बनाए रखने में मदद की है।
कुल मिलाकर रिपोर्ट छत्तीसगढ़ की PDS व्यवस्था की दो अलग तस्वीरें सामने रखती है। एक ओर 99.8 प्रतिशत पूर्ण राशन वितरण और 97.5 प्रतिशत मोबाइल लिंकिंग जैसी उपलब्धियां हैं, वहीं दूसरी ओर PMGKAY की जानकारी रखने वाले हितग्राहियों का अनुपात केवल 20.1 प्रतिशत है। ऐसे में अब चुनौती सिर्फ राशन को हितग्राही तक पहुंचाने की नहीं, बल्कि उन्हें अपने अधिकारों और सरकारी योजनाओं की पूरी जानकारी देने की भी है।