दशकों पुराने जर्जर स्कूल भवन में कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
बचेली . चिराग तले अंधेरा की तर्ज पर लौह अयस्क का विश्वप्रसिद्ध खदान होने के बावजुद भी बचेली नगर विकास के लिये तरसता नजऱ आता है । यहां नगर विकास के लिये प्रस्तावित कार्यो के लिए राशी प्रदान करने मे प्रशासन भी कंजुसी बरतता है और इसके विपरीत कुछ तथा कथित जनप्रतिनिधि और ठेकेदारो पर प्रशासन की मेहरबानी साफ नजऱ आती है जो प्रस्ताव बनाकर ले जाता वही टेंडर लेकर काम करता है । दरसल दशकों पुराना एक मात्र शासकीय हाई स्कुल की स्थिति जर्जर हो चुकी है।
दिवारें, छतें, दरवाजे, खिडकियां, फर्निचर आदी अपने हाल को बयान कर रहे हैं। पर ये दुर्भाग्यजनक परिस्थिति को प्रशासन की पारखी नजऱे नही देख पा रही हैं। शाला प्रबंधन समिति ने हाई स्कुल के पुनर्निर्माण के लिये कलेक्टर से आवेदन किया पर प्रशासन ने मरम्मत करने के नाम से 44 लाख रुपये अनुदान स्वीकृत किया पर जब राशी अपर्याप्त होने और राशी बढाने कि मांग शाला प्रबंधन समिति ने की तो मरम्मत की अनुदान राशी को यथावत रखते अतीरिक्त कक्ष निर्माण के लिये भी 42 लाख रुपये अनुदान स्वीकृत कर निविदा प्रक्रिया भी करा दी गई ।