रायपुर

कुनबा बढ़ाने क्लोनल मादा वनभैंसा दीपआशा पर टिकी उम्मीदें

- प्रदेश में अभी- 8 नर और मात्र दो मादा वनभैंसा - केंद्रीय चिडिय़ाघर प्राधिकरण में लंबित है दीपआशा को उदंती ले जाकर ब्रीडिंग करवाने की अनुमति
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Mar 15, 2020
कुनबा बढ़ाने क्लोनल मादा वनभैंसा दीपआशा पर टिकी उम्मीदें
कुनबा बढ़ाने क्लोनल मादा वनभैंसा दीपआशा पर टिकी उम्मीदें

रायपुर.राज्य पशु वन भैंसा की प्रजाति को बचाने वाले प्रोजेक्ट को फरवरी 2020 में आशा की मौत से तगड़ा झटका लगा था। मगर, अब उम्मीद की किरण क्लोनल मादा दीपआशा पर आ टिकी है, जो कुनबा बढऩे के लिए पूरी तरह परिपक्व है। दीपआशा पांच साल की हो चुकी है। नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट करनाल, हरियाणा द्वारा पैदा की गई दीपआशा को 2019 में छत्तीसगढ़ लाया गया, जहां उसे नंदनवन जंगल सफारी में रखा गया है। मगर, प्रजनन (ब्रीडिंग) के लिए तो उसे उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व ले जाना होगा।

इसके लिए वनभैंसा कंजर्वेशन समिति की 27 सितंबर 2019 को हुई बैठक में हरी झंडी मिल चुकी है। मगर, इस पर अंतिम फैसला केंद्रीय चिडिय़ाघर प्राधिकरण को लेना है। राज्य वन विभाग ने 1 अक्टूबर 2019 को प्राधिकरण को पत्र लिखकर दीपआशा को ट्रांसलोकेट करने की अनुमति मांगी थी, जो अब तक लंबित है। वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) के छत्तीसगढ़ प्रभारी डॉ. आरपी मिश्रा का कहना है कि हमें अनुमति का इंतजार है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि दीपआशा और खुशी खुशियां लेकर आएंगी। गौरतलब है कि प्रजनन के बाद मादा वन भैंसा को वापस जंगल सफारी लाया जाएगा।

खुशी से भी हैं उम्मीदें-

आशा की एकलौती बेटी खुशी अभी उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में है। 12 अप्रैल 2015 को जन्मी खुशी से भी उम्मीदें हैं। अभी उदंती में 2007 की गणना के अनुसार रामू, जुगाडू, श्यामू, कालिया, छोटी और राजा थे। 2013 में कालिया की मौत हुई। श्यामू व जुगाड़ू 2018 में मृत मिले थे। वहीं रामू की बीते तीन साल से कोई खबर नहीं है।

असम से वनभैंसा लाने की तैयारी-

केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद राज्य को असम से छह वनभैंसा लाने की अनुमति मिली है। इसके लिए एक टीम असम के मानस टाइगर रिजर्व में डेरा डाले हुए है। चार वन भैंसों को कब्जे में लिया गया है, जिनके डीएनए सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट का इंतजार है।

Published on:
15 Mar 2020 12:24 pm
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