इस बार अष्‍टमी, नवमी (Navmi) और दशहरे (Dussehra) को लेकर भी कुछ ऐसी ही स्थिति बनी हुई है।
रायपुर. 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि (Sharadiya Navratri) शुरू हो चुके हैं। नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। दुर्गा पूजा 10 दिनों तक मनाया जाने वाला त्योहार है और हर एक दिन का अपना अलग महत्व है। हर नवरात्र की तरह इस बार भी दुर्गा अष्टमी और नवमी (Ashtami and Navami) को लेकर लोगों के बीच भारी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई बार दो तिथियां एक ही दिन पड़ जाती हैं, इस वजह से दो त्योहार एक ही दिन में पड़ जाते हैं। इस बार अष्टमी, नवमी और दशहरे (Dussehra) को लेकर भी कुछ ऐसी ही स्थिति बनी हुई है।
इस नवरात्र पर्व पर इस बार नवमी और दशहरा उत्सव साथ-साथ मनेगा। 25 अक्टूबर को सुबह मां दुर्गा के नौवां स्वरूप महागौरी की आरती-अभिषेक और कन्या पूजन होगा और शाम को अधर्म पर धर्म की जीत का पर्व विजयादशी पर्व मनेगा। प्राचीन महामाया मंदिर के पंडित मनोज शुक्ला के अनुसार नवरात्रि पर्व की नवमी तिथि सूर्योदय के साथ दोपहर 1 बजे तक है, इसके बाद दशमी तिथि लग जाएगी।
पौराणिक मान्यता है कि लंका पर भगवान श्रीराम की जीत शाम होते होते हुई थी। इसलिए विजयादशमी पर्व शाम के समय ही मनाया जाता है। इस बार नवमी-दशमी तिथि की युति होने से दशहरा पर्व 25 अक्टूबर को मनेगा।