
रायपुर. राजधानी रायपुर एक तरफ Rajdhani Hospital में कोरोना की जंग लड़ने वाले, कोरोना को मात देने से पहले आग की चपेट में आकर जिंदगी की जंग हार गए। घटना के वक्त अस्पताल का स्टाफ अपनी जान बचाने के लिए मरीजों को छोड़कर बाहर की तरफ भागा। मगर, परिजनों ने हिम्मत दिखाई और अस्पताल में दाखिल हुए। अपने-अपने परिजनों को कोई चादर में लपेटकर उठाकर दौड़ा, तो कोई कंधे में रखकर। यह ऐसा मंजर भयावह था...।
COVID-19 हॉस्पिटल बनाया गया।
ICU में दाखिल हुए। आईसीयू बंद होता है। तत्काल जितनी भी खिड़कियां थी, सभी के कांच फोडे, ताकि धुआं बाहर निकले। लोग चिख-चिल्ला रहे थे। जहां-जहां से आवाज आती गईं और मरीज दिखाई देते गए, आग बुझाने के साथ उन्हें भी बाहर निकलते गए। गिनती तो नहीं है, पर 10 मरीजों को निकाला ही होगा। ये बेहोश भी हो रहे थे। मैंने एक शव को जली हुई अवस्था में देखा। फायर सिस्टम दिखाई नहीं दिया। (जैसा पत्रिका को लीडिंग फायरमैन जितेंद्र भट्ट ने बताया)
अस्पताल प्रबंधन पर एफआईआर हो
आग लगने की जानकारी के वक्त हम सभी अस्पताल के बाहर ही मौजूद थे। आग फैलती चली जा रही थी, धुआं बाहर निकल रहा था। हमने लोगों को मदद के लिए बुलाया, कोई हमारे पिता को बचा लो..., मगर कोई नहीं आया। बाद में उनके मृत होने की सूचना आई। इस घटना के लिए अस्पताल प्रबंधन पर एफआईआर होनी चाहिए। (जैसा कि मौके पर मृतक ईश्वर राव के परिजनों को गुहार लगाते सुना गया।)
2 लाख से अधिक खर्च, बहन नहीं रही
पत्रिका ने मृतिका वंदना के भाई किशोर से बात की। बोले, बहन वेंटिलेटर पर थी। हम 2 लाख रुपए से अधिक दे चुके थे। बहन नहीं रही। मैंने अभी मां को नहीं बताया है, बताऊंगा तो वह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाएगी।