
रायपुर. घर के मंदिर को हम ऐसा रखते हैं कि वहां जाने के बाद हमें सुख शांति का अनुभव हो और हिंदू मान्यता के अनुसार घर में एक छोटा सा मंदिर होना चाहिए जहां कि हम रोज अपने ईश्वर को याद कर सकें। हम अपने घर के मंदिर में ईश्वर की मूर्ति स्थापित करते हैं लेकिन गलती से कभी-कभी ऐसी मूर्तियां ला देते हैं जो कि हमारी बर्बादी का कारण होती है। कई विशेष बातें हैं जो कि शास्त्रों में बताया गया है जिसे हमें नहीं करना चाहिए ।
भगवान शिव का अवतार माने गए भैरव देव की मूर्ति घर में कभी नहीं लानी चाहिए। भैरव भगवान शिव का ही अवतार माने जाते हैं लेकिन भैरव देव तंत्र विधा के देवता हैं और इनकी उपासना घर के भीतर ना होकर बाहर ही करनी चाहिए।
घर में भगवान के रौद्र रूप की मूर्ति कभी भी नहीं लगानी चाहिए। रौद्र प्रतिमा या चित्र लगाने से घर में उग्र ऊर्जा पैदा होती है। घरों में हमेशा भगवान के सौम्य रूप के ही चित्र या प्रतिमाएं लगानी चाहिए।
राहु-केतु-शनि देव की तरह ही राहु-केतु की मूर्ति भी घर में नहीं लानी चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि, राहु एवं केतु तीनों ही पापी ग्रह हैं । इनकी मूर्ति घर में लाने से हम इनसे जुड़ी ऊर्जा को भी घर में ले आते हैं।
घर में भगवान की युद्ध करते हुए या राक्षस को मारते हुए दिखाने वाली मूर्ति या तस्वीर नहीं रखनी चाहिए। इसे भी रौद्र स्वरूप ही माना चाहता है। इसके दर्शन करने से घर में संकट आता है।
नटराज की मूर्ति घर में रखने की भूल ना करें। नटराज भगवान शिव का रौद्र रूप है यानि क्रोधित अवस्था और ऐसी मूर्ति घर में लाने से अशांति फैलती है।
पूजा स्थल में एक ही भगवान की दो मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। एक ही भगवान की दो मूर्तियां आस-पास तो बिल्कुल नहीं रखनी चाहिए। ऐसा होने पर उस घर में कलह होती है।