रायपुर

America-Iran-Israel war: युद्ध का असर से लकड़ी से लेकर लोहा-स्टील महंगा, डायग्नोस्टिक मशीनें 50 लाख तक महंगी

America-Iran-Israel war: स्टील निर्माण के लिए जरूरी सामग्री सिलिको मैगनीज 10 हजार रुपए टन महंगा हो चुका है। राजधानी के स्टील ट्रेडर्स प्रेमकुमार बताते हैं कि पांच दिन के भीतर सरिया की कीमतें 2500 रुपए चिल्हर में महंगी हो चुकी है।

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Apr 04, 2026

America-Iran-Israel war: @अजय रघुवंशी। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमरीका-ईरान-इजराइल युद्ध ने आम आदमी की जिंदगी पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। इसका असर सिर्फ अंतरराष्ट्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बाजार, अस्पताल, इलाज से लेकर किचन तक महंगाई की आंच पहुंच गई है। एलपीजी संकट की वजह से लकड़ी से लेकर लोहा महंगा हो चुका है। स्टील, स्क्रैप के महंगे होने की वजह से इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत बढ़ चुकी है।

मेडिकल उपकरण, दवाइयों, लोहा-स्टील और ड्राई फ्रूट्स, हर सेक्टर में कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। युद्ध का असर हेल्थ सेक्टर पर भी दिख रहा है, जहां पेट सीटी, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी हाईटेक मशीनें, जो अमरीका, जर्मनी और जापान से आयात होती हैं, उनकी कीमतों में 50 लाख रुपए तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि ये मशीनें समय पर अस्पतालों तक पहुंच भी नहीं पा रही हैं, जिससे मरीजों के इलाज में देरी और दिक्कतें बढ़ चुकी हैं। बाजार के हर सेक्टर में इस युद्ध का असर देखा जा रहा है। एलपीजी की किल्लत ने इंडक्शन की कीमतें बढ़ा दी है।

विदेशों से नहीं पहुंच रहा स्क्रैप

स्टील बनाने के लिए जरूरी स्क्रैप मटेरियल राज्य के उद्योगों तक नहीं पहुंच पा रहा है। औद्योगिक संगठनों के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया, साउथ आफ्रीका, दुबई और मिडिल ईस्ट से आने वाले स्क्रैप का आयात प्रभावित हुआ है। स्टील निर्माण के लिए जरूरी सामग्री सिलिको मैगनीज 10 हजार रुपए टन महंगा हो चुका है। राजधानी के स्टील ट्रेडर्स प्रेमकुमार बताते हैं कि पांच दिन के भीतर सरिया की कीमतें 2500 रुपए चिल्हर में महंगी हो चुकी है। वर्तमान में कीमतें 58 से 62 हजार रुपए प्रति टन बनी हुई हैं।.

ईरानी काजू, बादाम ड्राईफ्रूट्स महंगे, फलों में महंगाई

ईरान युद्ध ने न सिर्फ उद्योगपतियों बल्कि आम नागरिकों पर भी असर डाला है। एलपीजी के संकट के बाद ड्राईफ्रूट्स में प्रति किलो 300 से 400 रुपए की बढ़ोतरी हो चुकी है। ईरान और दुबई से आने वाले ड्राई फ्रूट्स और इंपोर्टेड फलों की कीमतों में 10 से 25 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। पिस्ता मगज, अंजीर, हींग, मामरा बादाम, पिस्ता, खजूर और बादाम की कीमतें 25 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है,वहीं ईरानी रिंग, खुबानी, शाहजीरा मुनक्का, खजूर में भी 10 से 18 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। पिस्ता, खजूर, और अंजीर जैसे उत्पादों की कीमतों की डिमांड ज्यादा और सप्लाई कम है। बादाम 1200, अंजीर 1600, खुबानी 800 रुपए प्रति किलो बिक रही है। न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया से आने वाले सेब की कीमतों में 50 से 80 रुपये किलो तक महंगाई देखी जा रही है।

लकड़ी 100 रुपए क्विंटल महंगी

एलपीजी संकट के बाद लकड़ी थोक व चिल्हर में 100 रुपए प्रति क्विंटल महंगी हो चुकी है। इससे पहले लकड़ी 800 से 900 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो कि वर्तमान में 1000 रुपये प्रति क्विंटल हो चुकी है। मठपुरैना के कारोबारी मो. रज्जाक ने बताया कि एलपीजी संकट के बाद लकड़ी की डिमांड बढ़ी है। हम वन विभाग से टेंडर के जरिए लकड़ी लेते हैं। चिल्हर में मांग बढ़ चुकी है।

युद्ध का असर शिक्षा पर, विदेश भेजने से घबरा रहे परिजन

विदेश में पढ़ाई का सपना संजोने वाले छात्रों के लिए इस समय हालात पहले जैसे नहीं रहे। खासकर अमरीका, ईरान और यूएई के बीच बढ़ते तनाव ने फॉरेन स्टडी के पूरे परिदृश्य को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। फारेन स्टडी एक्सपर्ट अश्विनी कुमार ने बताया कि हर साल रायपुर से 200 से अधिक छात्र पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं, लेकिन अब इस संख्या पर असर पड़ता दिख रहा है।

अमरीका, ईरान, रूस, जर्मनी, न्यूजीलैंड, कनाडा, आस्ट्रेलिया आदि देशों में छात्र इस बार पढ़ाई विदेश जाने में संकोच कर रहे हैं। मिडिल ईस्ट वार में कई देश एक साथ शामिल होने के बाद विदेश में अध्ययन अब खतरा मोल लेने जैसा हो चुका है, क्योंकि विदेशों में फंसे छात्रों को अब भी लौटने में मशक्कत करनी पड़ रही है।

सडक़ ठेकेदारों का अल्टीमेटम

इधर सडक़ ठेकेदारों ने अल्टीमेटम दे दिया है। बिल्डर एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कहा है कि युद्ध के हालात के बाद कीमतों में अप्रत्याशित बढ़ोतरों ने हालत खराब कर दी है। अनुबंधों व शर्तों में शिथिलता देते हुए राज्य व केंद्र सरकारों को आर्थिक पैकेज देना चाहिए। बीते दिनों बिल्डर एसोसिएशन के छत्तीसगढ़ चैंप्टर के कोर ग्रुप की बैठक राजधानी में हुई। छत्तीसगढ़ चैप्टर के अध्यक्ष रूपेश सिंघल ने कहा कि हमने राज्य व केंद्र सरकार से आर्थिक पैकेज की मांग की है।

खाड़ी देशों में युद्ध होने की वजह से पेट्रोकेमिकल पदार्थों की आवक प्रभावित हुई है। डामर, बिटुमिन, इमल्शन की कीमतों में 25 प्रतिशत तक वृद्धि हो चुकी है। इधर छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन बीरेश शुक्ला ने कहा कि सरकारी निर्माण कार्यों की टेंडर दरों की अपेक्षा सामग्रियों के रेट काफी बढ़े हैं। सडक़ बनाने वाले ठेकेदारों को डामर का स्टॉक नहीं मिल रहा है। ऐसी स्थिति में एसोसिएशन की कोर कमेटी की बैठक 10 अप्रैल को आयोजित की गई है, जिसमें प्रदेशभर से ठेकेदार शामिल होंगे। बैठक में सुझाव और विस्तृत चर्चा करने के बाद फैसला लेंगे।

प्लास्टिक रॉ मटेरियल 75 प्रतिशत महंगा, पालिथीन, सीमेंट बोरी में भी महंगाई

खाड़ी देशों से प्लास्टिक रॉ मटेरियल्स (कच्चा उत्पाद) की सप्लाई प्रभावित होने का सीधा असर अब छत्तीसगढ़ की इंडस्ट्री पर दिखने लगा है। सऊदी अरब जैसे प्रमुख सप्लायर देशों से कच्चे माल की आवक घटने के चलते प्लास्टिक सेक्टर में कच्चे माल की भारी किल्लत पैदा हो गई है। प्लास्टिक निर्माता संघ के मुताबिक हालात यह हैं कि पॉलिएस्टर, एलएलडीपी, पीपी दाना और सॉल्वेंट जैसे जरूरी रॉ मटेरियल्स की कीमतों में 50 से लेकर 75 प्रतिशत तक की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। निर्माता संघ के पदाधिकारी अमित धावना ने बताया कि राजधानी सहित प्रदेश की कई प्लास्टिक फैक्ट्रियां संकट में आ गई हैं। कई यूनिट्स को उत्पादन घटाना पड़ा है। मार्च महीने के भीतर कच्चे माल की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी की गई।

इस महीने शादियां, गैस सिलेंडर के लिए अभी से लाइन

शादियों का सीजन इसी महीने शुरू हो रहा है। इधर इवेंट कंपनियों के लिए एलपीजी बड़ी समस्या बनकर सामने आई है। शादी के पहले एलपीजी की व्यवस्था कैसे हो इसके लिए घर वाले अभी से चिंतित हैं। कई ऐसे परिवार देखे गए हैं, जहां घराती और बराती दोनों पक्ष मिलकर इस समस्या का हल निकालेंगे। यानि शादी के 15 से 20 दिन पहले ही गैस सिलेंडर की व्यवस्था करनी पड़ रही है। आमतौर पर सामान्य दिनों में एलपीजी के लिए इतनी मशक्कत नहीं करनी पड़ती थी।

विदेशों से आने वाले स्क्रैप का आयात प्रभावित हुआ है। रॉ मटेरियल्स के साथ ही देश में मिलने वाले आयरन ओर की कीमतें भी बढ़ चुकी है। सप्लाई बनी रही इस पर राज्य व केंद्र सरकार को प्रयास करने चाहिए।

मनीष धुुप्पड़, सचिव, छत्तीसगढ़ मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन

सडक़ निर्माण के लिए जरूरी सामग्रियों की कीमतों में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि हो चुकी है। आने वाले दिनों में यदि यही स्थिति रही तो कार्य बंद करने की नौबत आ सकती है। कई मार्ग में कार्य बंद भी हो चुका है। आर्थिक पैकेज की मांग को लेकर हम राज्य व केंद्र सरकार के मंत्रियों व अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।

रूपेश सिंघल, प्रदेशाध्यक्ष, बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (छत्तीसगढ़ चैप्टर,वेस्ट जोन)

ईरान युद्ध के कारण डायग्नोस्टिक मशीनें समय पर नहीं पहुंच पा रही हैं। यही नहीं ये मशीनें महंगी भी हो गई हैं। एमआरआई में उपयोग होने वाला हीलियम भी महंगा हो गया है।
डॉ. युसूफ मेमन, निदेशक, संजीवनी कैंसर अस्पताल
फैक्ट फाइल

कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी एक नजर में

सामग्री - पहले - अब

स्टील - 60 हजार - 62 हजार

डामर - 50 हजार टन - 84 हजार टन

एल्मुनियम पार्ट - 320 रु. किलो - 435 रु. किलो

विदेशी सेब- 200 रुपए किलो- 270 रुपए किलो

ईरानी बादाम- 800- 1200 रुपये किलो

ईरानी अंजीर- 1200-1600 रुपये किलो

पेट्रोल- 99.4 लीटर 3- 100.45 रुपये लीटर

ऑटो एलपीजी- 60.04 लीटर -85.32 रुपये लीटर

इंडक्शन- 1200 रुपये-1600 रुपये

(नोट-आंकड़े बाजार विशेषज्ञों से मिली जानकारी मुताबिक )

Published on:
04 Apr 2026 12:31 pm
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