
रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के मंच से प्रदेश की नई उद्योग नीति जारी की। साइंस कॉलेज मैदान में शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे लिए जीडीपी विकास का पैमाना नहीं है, बल्कि समावेशी विकास हमारा लक्ष्य है। 1 नवम्बर 2019 से 31 अक्टूबर 2024 के लिए बनी नई नीति में सरकार ने भविष्य की जरूरतों वालों उद्योगों पर जोर दिया है।
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सरकार ने पहली बार आधुनिक प्रौद्योगिकी आधारित रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, एयरक्राफ्ट रिपेयर जैसे उद्योगों, हरित प्रौद्योगिकी आधारित जैव ईंधन अथवा एथेनाल की रिफाइनरी, इलेक्ट्रिक वाहनों, उनमें लगने वाली बैट्री, चार्जिंग स्टेशन के उपकरण, कृषि आधारित खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को अधिकतम प्रोत्साहन देने के लिए उच्च प्राथमिकता श्रेणी बनाई है। ऐसे उद्योगों को अधिकतम 55 लाख रुपए तक का ब्याज अनुदान सरकार 11 वर्षों तक देगी। प्राथमिकता वाले उद्योगों को 10 वर्ष तक अधिकतम 50 लाख रुपए का ब्याज अनुदान और सामान्य उद्योगों को 8 वर्षों तक 40 लाख रुपए प्रतिवर्ष का ब्याज अनुदान मिलेगा। वहीं पिछली उद्योग नीति से उलट कोर सेक्टर के उद्योगों को भी प्रोत्साहन देने की घोषणा कर दी गई है। हालांकि स्पंज आयरन, स्टील प्लांट, ताप बिजलीघर और राइस मिल जैसे कोर सेक्टर के उद्योगों को यह प्रोत्साहन सी और डी श्रेणी के अतिपिछड़े विकासखंडों में उद्योग लगाने पर ही मिलेगा। सरकार ने सी और डी श्रेणी के विकासखंडों में निवेश करने वालों को अधिकतम सुविधाएं देने की घोषणा की है। औद्योगिक प्रोत्साहन का लाभ पाने के लिए उद्योगों को अकुशल श्रमिकों के मामले में राज्य के निवासियों को 100 प्रतिशत आरक्षण देना होगा। कुशल श्रमिकों को 70 प्रतिशत और प्रशासकीय और प्रबंधकीय श्रेणी में 40 प्रतिशत स्थानीय लोगों की भर्ती करनी होगी।
सेवा क्षेत्र को भी भारी प्रोत्साहन
सरकार ने पहली बार उद्योग नीति में सेवा क्षेत्र को भी शामिल किया है। ऐसी गतिविधियों को जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र एक प्रमाणपत्र प्रदान करेगा। अनुसंधान और विकास के लिए प्रयोगशालाएं स्थापित करने वाले उद्योगों को सेवा क्षेत्र जैसी ही सुविधाएं मिलेंगी।
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कड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने कुछ प्रदूषणकारी उद्योगों को निवेश प्रोत्साहन के अपात्र उद्योगों की श्रेणी में रख दिया है। पॉलीथिन बैग, प्लास्टिक के डिस्पोजेबल उत्पाद और पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर जैसे उद्योगों को पूरे प्रदेश में कोई प्रोत्साहन नहीं मिलेगा।
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सरकार ने नए उद्योगों के लिए नेट राज्य वस्तु एवं सेवाकर प्रतिपूर्ति की नई सुविधा दी है। राज्य में उत्पादित हर्बल, वनौषधि और लघु वनोपज आधारित उद्योगों को भी नेट जीएसटी की प्रतिपूर्ति, स्टाम्प डयूटी में छूट और विद्युत शुल्क में छूट दी जाएगी।
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0 सरकारी विभागों के लिए स्थानीय इकाइयों का उत्पाद खरीदना अनिवार्य।
0 राज्य से निर्यात के लिए नजदीकी बंदरगाह तक माल ढुलाई पर परिवहन अनुुदान।
0 बस्तर और सरगुजा में 20 एकड़ तक निजी औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना को अनुमति। उन्हें बुनियादी ढांचे के लिए 4 करोड़ रुपए तक अनुदान।
0 5 वर्षों तक अधिकतम दो करोड़ रुपए का मंडी शुल्क माफ।
0 स्वसहायता समूहों और किसान उत्पादक समूहों को भी निवेशकों की श्रेणी में शामिल कर प्रोत्साहन।