रायपुर

UPSC Mains 2026 Exam: 17-18 सवाल किए हैं तो इंटरव्यू की करें तैयारी, एग्जाम एक्सपर्ट ने दिए सुझाव

UPSC Mains Exam 2026: यूपीएससी एग्जाम एक्सपर्ट ने बताया कि इस बार प्रश्नपत्रों में सवालों का स्तर कई जगह आसान रहा, लेकिन प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत लंबे रहे। सामान्य अध्ययन के चौथे पेपर यानी एथिक्स ने अभ्यर्थियों को सबसे ज्यादा चुनौती दी..
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Aug 31, 2026
UPSC exam, UPSC exam 2026
UPSC Exam (फोटो- Patrika.com)

UPSC Mains Exam: ताबीर हुसैन की रिपोर्ट. संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा मुख्य परीक्षा का रविवार को आखिरी पेपर हुआ। इसके साथ ही परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों का करीब एक सप्ताह से चल रहा लिखित परीक्षा का सफर पूरा हो गया। परीक्षा के सभी पेपर का विश्लेषण करते हुए यूपीएससी एग्जाम एक्सपर्ट निखिल अग्रवाल ने बताया कि इस बार प्रश्नपत्रों में सवालों का स्तर कई जगह आसान रहा, लेकिन प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत लंबे रहे। खास तौर पर सामान्य अध्ययन के चौथे पेपर यानी एथिक्स ने अभ्यर्थियों को सबसे ज्यादा चुनौती दी।

UPSC Mains Exam 2026: 10 अभ्यर्थी रहे गैरहाजिर

पहले दिन जहां 3 अभ्यर्थी गैरहाजिर रहे, वहीं आखिरी दिन यह संख्या 10 हो गई। जीएस पेपर-1 में इस बार पिछले वर्षों की तरह किसी खास टर्म या कॉन्सेप्ट को सीधे केंद्र में रखकर सवाल पूछने का चलन कम दिखाई दिया। पहले जहां जनसांख्यिकीय लाभांश जैसे विशिष्ट टर्म पर सवाल पूछे जाते रहे हैं, इस बार प्रश्न अपेक्षाकृत सामान्य रखे गए। इसका फायदा उन अभ्यर्थियों को मिला, जिन्होंने विषयों की व्यापक और सामान्य तैयारी की थी।

इसी तरह जीएस पेपर-2 में भी सवाल काफी सामान्य प्रकृति के रहे। यानी अभ्यर्थी से किसी एक खास तथ्य या शब्द की बजाय विषय को समझने और उसे व्यापक संदर्भ में प्रस्तुत करने की अपेक्षा की गई। हालांकि, पिछले करीब तीन वर्षों की तुलना में इस बार प्रश्नपत्र कुछ लंबे रहे। सवाल बहुत कठिन नहीं थे, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए समय प्रबंधन अहम रहा।

जीएस-3 में करंट अफेयर्स का असर

जीएस पेपर-3 हमेशा की तरह करंट और स्टैटिक दोनों हिस्सों का मिश्रण रहा। इस बार भी करंट अफेयर्स का प्रभाव देखने को मिला। ऐसे में जिन अभ्यर्थियों ने समसामयिक घटनाओं को अपने स्टैटिक विषयों से जोडक़र तैयारी की थी, उन्हें उत्तर लिखने में अपेक्षाकृत आसानी रही।

जीएस-4 बना सबसे बड़ी चुनौती

पूरी परीक्षा में जीएस पेपर-4 यानी एथिक्स को निखिल अग्रवाल ने सबसे कठिन पेपर बताया। उनके अनुसार पिछले करीब पांच वर्षों के मुकाबले इस बार एथिक्स का प्रश्नपत्र अधिक चुनौतीपूर्ण रहा। इसका एक बड़ा कारण सवालों की प्रस्तुति और उनकी लंबाई रही। जहां पहले प्रश्न अपेक्षाकृत कम जगह में होते थे, वहीं इस बार कई सवाल करीब एक पेज तक फैले हुए नजर आए। इससे अभ्यर्थियों पर न केवल प्रश्न समझने, बल्कि सीमित समय में उत्तर पूरा करने का दबाव भी बढ़ा।

निबंध में नहीं दिखा दार्शनिक सवालों का दबाव

निबंध के पेपर में भी इस बार एक बदलाव देखने को मिला। आमतौर पर यूपीएससी के निबंध में दार्शनिक प्रकृति के सवाल, किसी प्रसिद्ध व्यक्तित्व के विचार या उद्धरण आधारित विषय अभ्यर्थियों के सामने चुनौती रखते हैं। उदाहरण के तौर पर महात्मा गांधी या दलाई लामा जैसे व्यक्तित्वों के विचारों पर आधारित विषय पूछे जाते रहे हैं। लेकिन इस बार ऐसा कोई प्रमुख उद्धरण आधारित या अत्यधिक दार्शनिक सवाल नहीं आया। निबंध के विषय अपेक्षाकृत सरल और सीधे रहे। छठा और सातवां पेपर अभ्यर्थियों के वैकल्पिक विषयों का था, जो सामान्य तौर पर अपेक्षित पैटर्न के अनुरूप रहा।

17-18 सवाल किए हैं तो भी इंटरव्यू की तैयारी शुरू करें

अब सबसे बड़ा सवाल है कि किस अभ्यर्थी को इंटरव्यू की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए? इस पर निखिल कहते हैं कि जिन अभ्यर्थियों ने सभी सवाल अटेम्प्ट किए हैं, उन्हें बिना समय गंवाए इंटरव्यू की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। वहीं, अगर किसी अभ्यर्थी ने 20 में से 17-18 सवाल किए हैं, लेकिन उत्तर कंटेंट के लिहाज से बेहतर हैं और उसने संतुष्टि के साथ उत्तर लिखा है तो उसे भी इंटरव्यू की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। यूपीएससी में केवल पन्ने भरना मायने नहीं रखता। उत्तर की गुणवत्ता, विषय की समझ और उसे प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

Updated on:
31 Aug 2026 01:11 pm
Published on:
31 Aug 2026 01:11 pm