
अजय रघुवंशी/Food Testing Fee: त्योहारों से पहले खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने बाजार में जांच अभियान तेज कर दिया है। विभाग ‘बने खाबो-बने रहिबो 2.0’ अभियान के तहत सैंपल जुटाकर मिलावटखोरों पर कार्रवाई का दावा कर रहा है, लेकिन बाजार में बिक रहे खाद्य पदार्थों की शुद्धता जांचना आम आदमी के लिए बहुत महंगा साबित हो रहा है।
अगर कोई आम नागरिक अपने स्तर पर खाने-पीने की किसी चीज की मिलावट की जांच कराने विभाग की लैब पहुंचे, तो उसे 1500 रुपए से लेकर 16 हजार रुपए तक की भारी-भरकम फीस चुकानी होगी। इस तय फीस पर जीएसटी अलग से लागू होता है। ऐसे में मिलावट की पहचान करना आम जनता की पहुंच से बाहर हो चुका है। हाल ही में राज्य सरकार ने एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाया है। इसके बावजूद बाजार में बड़ी मात्रा में एनालॉग पनीर बरामद हो रहा है। इस लगातार हो रहे खुलासे के बाद असली और नकली पनीर की पहचान को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं।
यदि कोई व्यक्ति मोटी फीस चुकाकर सैंपल जमा भी कर दे, तो उसे जांच रिपोर्ट कब मिलेगी, इसकी कोई स्पष्ट गारंटी नहीं है। विभागीय नियमों के अनुसार 14 दिनों के भीतर रिपोर्ट मिल जानी चाहिए, लेकिन हकीकत यह है कि विभाग खुद के लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने में एक से दो महीने का समय लगा देता है। नतीजा यह होता है कि लोगों को मिलावटी खाद्य पदार्थों की जानकारी समय पर नहीं मिल पाती।
बढ़ती शिकायतों को देखते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने प्रदेशभर के अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने कहा है कि अभियान के तहत लिए गए सभी सैंपलों की जांच तेजी से पूरी की जाए और त्योहारों से ठीक पहले रिपोर्ट जारी कर दी जाए। अधिकारियों के मुताबिक रायपुर के कालीबाड़ी स्थित राज्य स्तरीय लैब में दिन-रात सैंपलों की जांच की जा रही है।
शासन ने एनालॉग पनीर की बिक्री पर रोक तो लगा दी है, लेकिन असली और नकली पनीर में फर्क कर पाना आम ग्राहकों और दुकानदारों दोनों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। डेयरियों और रिटेल दुकानों में खुला तथा पैकेटबंद पनीर धड़ल्ले से बिक रहा है, पर कौन सा असली है और कौन सा एनालॉग, इसे लेकर विभाग की ओर से रिटेल दुकानदारों के लिए अब तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश या गाइडलाइन जारी नहीं की गई है।
खाद्य उत्पादों के सैंपलों की जांच के लिए फीस पहले से निर्धारित है। अलग-अलग वैज्ञानिक मशीनों और मानकों से जांच की लागत अलग होती है। यह दरें भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा तय की गई हैं। फीस में कमी करने को लेकर शासन को प्रस्ताव भेजा जा सकता है। फिलहाल आगामी त्योहारों को देखते हुए प्रदेश के सभी जिलों से लगातार सैंपल एकत्र कर जांच की जा रही है- दीपक अग्रवाल, नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग
प्रमुख बाजार: रायपुर के गुढ़ियारी थोक बाजार, डुमरतराई थोक बाजार, गोलबाजार, पचपेड़ी नाका बाजार आदि क्षेत्रों में विभागीय टीमों ने दबिश दी।
जांच के दायरे में आए उत्पाद
त्योहारों से पहले पनीर, देशी घी, कुरकुरे, कोल्ड ड्रिंक्स, पैक्ड मिठाइयां (रसगुल्ला, लड्डू, पेड़ा, बर्फी, गुलाब जामुन, सोन पापड़ी, कलाकंद, काजू कतली), खोवा, चना दाल, गेहूं, मसूर दाल, पतंजलि घी, अनीक घी, धौलपुर फ्रेश घी, काउ घी और डालडा वनस्पति घी आदि के सैंपल लिए गए हैं।
अभियान का दायरा
रायपुर के अलावा दुर्ग, बिलासपुर, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, महासमुंद, राजनांदगांव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, सुकमा, सरगुजा-सूरजपुर, गौरेला, बस्तर, धमतरी और कोंडागांव जिलों में सघन जांच चल रही है।