24 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

जड़ी-बूटी नहीं, केमिकल का खेल? जांच में हुआ बड़ा खुलासा- आयुर्वेद के नाम पर एलोपैथी की मिलावट, किडनी-लिवर खतरे में…

Chhattisgarh Ayurvedic Medicine News: आयुर्वेदिक दवाओं की शुद्धता पर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले कुछ वर्षों में लिए गए कई आयुर्वेदिक दवाओं के सैंपल जांच में फेल पाए गए हैं।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

रायपुर

•

image

Shradha Jaiswal

•

Updated: 17 Jan 2026, 8:54 AM IST

आयुर्वेद या धोखा? मधु निवारक चूर्ण में खतरनाक एलोपैथिक दवाओं का सच(photo-patrika)

आयुर्वेद या धोखा? मधु निवारक चूर्ण में खतरनाक एलोपैथिक दवाओं का सच(photo-patrika)

Chhattisgarh Ayurvedic Medicine News: छत्तीसगढ़ में आयुर्वेदिक दवाओं की शुद्धता पर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले कुछ वर्षों में लिए गए कई आयुर्वेदिक दवाओं के सैंपल जांच में फेल पाए गए हैं। खासतौर पर डायबिटीज कंट्रोल करने वाली ‘मधु निवारक चूर्ण’ में तय मात्रा से 10 गुना अधिक एलोपैथिक दवाएं—मेटफार्मिन और ग्लीमीप्राइड मिलने का खुलासा हुआ है। यह तथ्य स्टेट लेवल लैब की जांच में सामने आया है।

Chhattisgarh Ayurvedic Medicine News: डायबिटीज, गठिया और अस्थमा की दवाओं में ज्यादा मिलावट

जांच रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा मिलावट डायबिटीज, गठिया-वात और अस्थमा से जुड़ी आयुर्वेदिक दवाओं में की जा रही है। गठिया और वात जोड़ों के दर्द से संबंधित बीमारियां हैं, जिनकी समस्या सर्दियों में बुजुर्गों सहित कई लोगों में बढ़ जाती है। ऐसे में लोग साइड इफेक्ट से बचने के लिए आयुर्वेदिक दवाओं का सहारा लेते हैं, लेकिन हकीकत इससे उलट निकल रही है।

पेनकिलर समझकर सेवन, असर उल्टा

लोग यह मानकर आयुर्वेदिक दवाएं लेते हैं कि इनमें किसी तरह का नुकसान नहीं होगा, लेकिन एलोपैथिक कंटेंट की मिलावट से ये दवाएं पेनकिलर की तरह काम कर रही हैं, जो लंबे समय में गंभीर दुष्प्रभाव पैदा कर सकती हैं।

किडनी और लिवर के लिए घातक

आयुर्वेदिक कॉलेज स्थित लैब में जिन दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, वे प्रदेश के विभिन्न जिलों से लिए गए थे।
विशेषज्ञों के अनुसार मधु निवारक चूर्ण में 10 गुना अधिक मेटफार्मिन और ग्लीमीप्राइड मिलना किडनी और लिवर के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है।

महंगे दाम, सस्ता उत्पादन

जानकारों के मुताबिक बाजार में इस चूर्ण की अधिकतम कीमत करीब 2000 रुपए तक है, जबकि वास्तविक लागत 150 से 200 रुपए के बीच बताई जा रही है। दुकानदार इसे 10 से 20 फीसदी छूट के साथ बेचकर भारी मुनाफा कमा रहे हैं।

विशेषज्ञ की राय

डॉ. हरिंद्रमोहन शुक्ला, पूर्व कंट्रोलर लैब एवं प्रोफेसर, आयुर्वेदिक कॉलेज का कहना है कि डायबिटीज नियंत्रण के नाम पर बिक रहे आयुर्वेदिक चूर्ण में तय मानकों से 10 गुना अधिक एलोपैथिक दवाओं की मौजूदगी बेहद चिंताजनक है। उनका कहना है कि इतनी अधिक मात्रा में मेटफार्मिन और ग्लीमीप्राइड का सेवन लंबे समय तक करने से मरीजों की किडनी और लिवर पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं, जो आगे चलकर जानलेवा भी साबित हो सकते हैं।

नियंत्रण और निगरानी की जरूरत

इस खुलासे के बाद आयुर्वेदिक दवाओं की गुणवत्ता, निगरानी और नियमित जांच पर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सख्त कार्रवाई और पारदर्शी जांच के बिना आम लोगों के स्वास्थ्य से हो रहा यह खिलवाड़ नहीं रुकेगा।