
CG Raipur News : स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था चरमरा गई है। मरीजों की देखभाल से जुड़े सभी काम पैरा मेडिकल स्टाफ के हाथों होता है। हड़ताल की वजह से उनकी देखरेख करने वाला भी कोई नहीं है। टेक्नीशियंस के नहीं होने से विभिन्न तरह की जांचें प्रभावित हो रहीं हैं। ऐसे में कई ऑपरेशन भी टाले जा रहे हैं। बुधवार को अकेले रायपुर के ही 3 अस्पतालों आंबेडकर,(Raipur News) डीकेएस और जिला चिकित्सा चिकित्सालय में ही 50 से ज्यादा मेजर-माइनर ऑपरेशन टालने पड़े।
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इमरजेंसी ऑपरेशन के लिए अस्पतालों में जरूरी इंतजाम किए गए हैं। ऐसे में रोड एक्सीडेंट या अन्य दुर्घटनाओं में घायल मरीजों का इलाज हो गया। दूसरी ओर ऐसे मरीज जो लंबे वक्त से किसी बीमारी से परेशान हैं, (cg news) उनका ऑपरेशन टल गया। वो इसलिए क्योंकि ऐसे मरीजों के लिए कई तरह की जांच जरूरी होती है। एक्स-रे, सोनोग्राफी, पैथोलॉजी समेत सभी तरह की जांच बंद होने से इन मरीजों का ऑपरेशन न प्लान किया जा सका और न ही पहले से प्लान्ड ऑपरेशन को अंजाम दिया जा सका। (cg raipur news) जानकार बताते हैं कर्मचारियों की हड़ताल कुछ दिन और चली तो सरकारी अस्पतालों का हाल और बुरा होगा।
बिजली-पानी सप्लाई बहाल रखा
वैसे तो स्वास्थ्य कर्मियों के हड़ताल पर जाने से पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। फिर भी कर्मचारियों ने इस बात का ध्यान रखा है कि इमरजेंसी सेवाएं बाधित न हों, इसलिए ऑक्सीजन सप्लाई, पानी, बिजली, ओटी और इमरजेंसी, ट्रामा यूनिट, आईसीसीयू में पदस्थ कर्मचारियों को हड़ताल से अलग रखा है।
जांच हुई न इलाज मिला
स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से सरकारी अस्पतालों में जांच से लेकर इलाज तक, सब प्रभावित हो गया है। बुधवार सुबह लोग ओपीडी पहुंचे तो डॉक्टर से मिलने उन्हें घंटों लाइन में इंतजार करना पड़ा। किसी तरह नंबर आया और डॉक्टर ने जांच करवाने कहा तो पता चला कि सारी जांचें ही ठप पड़ी हैं। मजबूरन लोगों को बाहर की लैब से जांच करवानी पड़ी। अब अगले दिन फिर लंबी लाइन लगकर उन्हें जांच रिपोर्ट दिखानी होगी, जिसके बाद इलाज हो सकेगा।
इन मांगों को लेकर हड़ताल पर कर्मचारी
प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के उप-प्रांताध्यक्ष एसपी देवांगन, महामंत्री अश्वनी गुर्देकर ने बताया कि वेतन सुधार, संविदा तथा दैनिक वेतन भोगी स्वास्थ्य कर्मियों का नियमितिकरण, नियमित भर्तियों से पहले सभी संविदा व दैनिक वेतन भोगियों को नियमित करने, स्वास्थ्य कर्मचारियों को पुलिस विभाग की तरह 1 साल में 13 महीने का वेतन देने, ओपीडी समयावधि को 1 पाली में सुबह 8-2 करने, चार स्तरीय वेतनमान देने, तकीनीकी पदों हेतु 4 स्तरीय पदोन्नति चैनल, स्टाफ नर्स को 3-4 वेतन वृद्धि समेत 24 मांगें हैं।
जांच हुई न इलाज मिला
स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से सरकारी अस्पतालों में जांच से लेकर इलाज तक, सब प्रभावित हो गया है। बुधवार सुबह लोग ओपीडी पहुंचे तो डॉक्टर से मिलने उन्हें घंटों लाइन में इंतजार करना पड़ा। किसी तरह नंबर आया और डॉक्टर ने जांच करवाने कहा तो पता चला कि सारी जांचें ही ठप पड़ी हैं। मजबूरन लोगों को बाहर की लैब से जांच करवानी पड़ी। अब अगले दिन फिर लंबी लाइन लगकर उन्हें जांच रिपोर्ट दिखानी होगी, जिसके बाद इलाज हो सकेगा।
इन मांगों को लेकर हड़ताल पर कर्मचारी
प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के उप-प्रांताध्यक्ष एसपी देवांगन, महामंत्री अश्वनी गुर्देकर ने बताया कि वेतन सुधार, संविदा तथा दैनिक वेतन भोगी स्वास्थ्य कर्मियों का नियमितिकरण, नियमित भर्तियों से पहले सभी संविदा व दैनिक वेतन भोगियों को नियमित करने, स्वास्थ्य कर्मचारियों को पुलिस विभाग की तरह 1 साल में 13 महीने का वेतन देने, ओपीडी समयावधि को 1 पाली में सुबह 8-2 करने, चार स्तरीय वेतनमान देने, तकीनीकी पदों हेतु 4 स्तरीय पदोन्नति चैनल, स्टाफ नर्स को 3-4 वेतन वृद्धि समेत 24 मांगें हैं।