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CGPSC में चल रही फर्जी भर्तियां, जिस डॉक्टर का चयन रद्द किया उसी को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया, पत्रिका का बड़ा खुलासा

Chhattisgarh News: सीजीपीएससी खुलआमे मनमानी पर उतर आया है। जिस डॉक्टर का चयन रद्द किया था उन्हीें को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया है। जबकि नए असिस्टेंट प्रोफेसर के चयन के लिए 14 जुलाई को फिर से इंटरव्यू कर रहा है..
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CGPSC Scam news

CGPSC में चल रही फर्जी भर्तियां ( File photo-patrika)

Chhattisgarh PSC Scam: पीलूराम साहू की रिपोर्ट. सीजीपीएससी ने विवाद के बाद कार्डियो थोरेसिक एंड वेस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर का चयन रद्द कर दिया था। लापरवाही की हद ये है कि उन्हीं डॉक्टर को चिकित्सा शिक्षा विभाग ने ज्वाइन कराने के लिए 13 जुलाई को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया है। जबकि पीएससी नए असिस्टेंट प्रोफेसर के चयन के लिए 14 जुलाई को फिर से इंटरव्यू कर रहा है।

CGPSC Scam: तकनीकी त्रुटि का हवाला देकर रद्द किया था चयन

पत्रिका की खबर के बाद पीएससी ने चयन में वरीयता देने में तकनीकी त्रुटि का हवाला देते हुए 4 जून को असिस्टेंट प्रोफेसर का चयन रद्द कर दिया था। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया को पत्र भेजा गया था। पत्रिका ने 3 जून के अंक में योग्य डॉक्टर बाहर, बिना डिग्री वाले छात्र पर पीएससी मेहरबान तथा 4 जून को डिग्रीधारी कार्डियक एनेथेटिस्ट ने पीएससी सचिव से पूछा-किस आधार पर बिना डिग्री वाले का चयन हेडिंग से समाचार प्रकाशित किया था।

Chhattisgarh News: डिग्री वाले डॉक्टर का चयन निरस्त

इसके बाद सीजीपीएससी ने कार्डियक एनीस्थीसिया विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में चयनित बिना डिग्री वाले डॉक्टर का चयन निरस्त कर दिया था। पीएससी ने इस बात को स्वीकारा था कि शैक्षणिक योग्यता के आधार पर अभ्यर्थी चयन में वरीयता देने में तकनीकी त्रुटि हुई है। पत्रिका ने भी डीएम की पढ़ाई कर रहे डॉक्टर के चयन पर सवाल उठाए थे। दरअसल जब ट्रांजिक्शन नियमों को खंगाला गया तो पीएससी के अधिकारियों को अपनी गलती का एहसास हुआ और समाचार प्रकाशित होने के दो दिन में ही डॉक्टर के चयन को निरस्त कर दिया। पीएससी के पत्र के अनुसार डॉ. अनिल गुप्ता का चयन निरस्त किया गया था।

इधर एसीआई में कार्डियक, एनेस्थेटिस्ट ने छोड़ी नौकरी

इधर नेहरू मेडिकल कॉलेज स्थित एसीआई में सीटीवीएस विभाग के संविदा कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. बालकृष्ण साहू ने नौकरी छोड़ दी है। उन्होंने कम वेतन मिलने का हवाला दिया है। उन्हें 2 लाख मासिक सैलरी पर ज्वाइन कराया गया था, लेकिन टीडीएस व एनपीए काटकर 1.40 लाख रुपए मिल रहा था। जबकि उन्हें एक चैरिटी अस्पताल में साढ़े 5 लाख मासिक सैलरी मिल रही है। इसके पहले कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. तान्या छौड़ा ने भी इस्तीफा दे दिया था। इससे विभाग में बायपास सर्जरी से लेकर वॉल्व रिप्लेसमेंट अटक गया था। गनीमत है कि वर्तमान में एक संविदा कार्डियक एनेस्थेटिस्ट सेवाएं दे रहे हैं। इसलिए मरीजों का ऑपरेशन नहीं रुका है।

स्पेशलिस्ट व सुपर स्पेशलिस्ट, डॉक्टर इसलिए छोड़ रहे नौकरी

  • कम वेतन व समय पर प्रमोशन नहीं
  • निजी कॉलेज व अस्पतालों में दोगुना वेतन।
  • सुपर स्पेशलिटी को स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की तरह वेतन
  • अलग से कैडर नहीं बना
  • मप्र में अलग कैडर व समय पर प्रमोशन

डीएमई, डॉ. यूएस पैकरा, जिस डॉक्टर का चयन रद्द किया गया, उन्हें दस्तावेज सत्यापन के लिए क्यों बुलाया गया है, इसकी पड़ताल की जाएगी।