बोतल बंद पानी को एमआरपी से ज्यादा बेचना और वस्तुओं में डबल एमआरपी लिखना होटल बार और शॉपिंग मॉल को महंगा पड़ गया है।
अजय रघुवंशी/ रायपुर. बोतल बंद पानी को एमआरपी से ज्यादा बेचना और वस्तुओं में डबल एमआरपी लिखना होटल बार और शॉपिंग मॉल को महंगा पड़ गया है। नाप-तौल विभाग ने अलग-अलग शिकायत के आधार पर राजधानी के बड़े शॉपिंग मॉल और होटल-बार में दबिश देकर इस फर्जीवाड़ा का खुलासा करते हुए जुर्माना ठोंका है, वहीं लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर कार्रवाई चल रही है। कई लोगों ने बोतलबंद पानी मामले में एमआरपी से ज्यादा कीमत पर बेचने की शिकायत नाप-तौल विभाग में की थी। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई शुरू की। विभाग के अधिकारियों ने कहा कि एमआरपी से ज्यादा कहीं भी बोतलबंद पानी की बिक्री नहीं की जा सकती है। चाहे वह शॉपिंग मॉल हो या होटल-बार। इसी प्रकार किसी भी वस्तु पर ऑफर या आकर्षक योजनाओं के नाम पर भी डबल एमआरपी जैसी भ्रमित करने वाली कीमत भी नहीं लिखी जा सकती।
एक बोतल पानी 38 रुपए का
पंडरी स्थित होटल पुनीत एंड बार में शिकायत के आधार पर विभाग ने कार्रवाई की। यहां एक लीटर बोतलबंद पानी ३८ रुपए में बेचने की शिकायत मिली थी। ग्राहक की शिकायत के बाद नाप-तौल निरीक्षकों ने स्टिंग करते हुए पानी बोतल खरीदा। इसके बाद संस्थान पर १० हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।
मैग्नेटो मॉल के बिग-बाजार में भी वस्तुओं पर डबल एमआरपी
राजधानी के मैग्नेटो मॉल स्थित बिग-बाजार में एक ही वस्तु पर डबल एमआरपी लिखे जाने की शिकायत विभाग में पहुंची। इसके बाद अधिकारियों ने ग्राहक के बिल और वस्तुस्थिति की पड़ताल की। जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद बिग बाजार पर २५ हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।
वालमार्ट में 25 हजार जुर्माना
भनपुरी स्थित वालमार्ट में भी डबल एमआरपी के बाद विभाग ने कार्रवाई की। यहां २५ हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।
अंबुजा मॉल के बिग बाजार पर कार्रवाई
विधानसभा रोड स्थित अंबुजा मॉल के बिग बाजार में बिना पंजीयन के ब्रेड पैकेट की बिक्री पाई गई। विभाग के अधिकारियों ने जांच के बाद १९ हजार रुपए का जुर्माना लगाया।
जीएसटी के बाद अब गैरकानूनी
जीएसटी लागू होने के पहले भी एमआरपी से ज्यादा कीमत पर किसी वस्तु को बेचना अवैध था, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक पानी बोतल से लेकर अन्य सामानों में एक एमआरपी होनी चाहिए।
क्या है जरूरी यह जान लें-
1. डिब्बाबंद यानी पानी बोतल या पैकेज्ड, सीलबंद पर अंकित मूल्य से अधिक कीमत लेने पर तुरंत क्षेत्रीय नाप-तौल अधिकारी को शिकायत करें।
2. अंकित मूल्य से अधिक कीमत पर सामान न खरीदें।
3. निर्माता/पैकर का नाम
व पूर्ण पता
4. वस्तु का नाम जो डिब्बे
में पैक की गई है।
5. वस्तु की शुद्घ मात्रा।
6. अधिकतम खुदरा मूल्य।
7. निर्माण/पैकिंग का माह एवं वर्ष।
8. कस्टमर केयर नबंर अथवा वेबसाइट जरूर अंकित होना चाहिए।
इनका कहना है-
राज्य सरकार के दिशा-निर्देश और ग्राहकों से मिले शिकायत के आधार पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, कई अन्य शिकायतों पर भी जांच चल रही है।
एके पाठक, नियंत्रक, विधिक माप विज्ञान (नाप-तौल विभाग)
शिकायत के आधार पर राजधानी के अलग-अलग संस्थानों में डबल एमआरपी, पानी की बोतल को प्रिंट रेट से अधिक कीमत पर बेचने आदि मामलों पर कार्रवाई की गई है।
एसएल विश्व, सहायक नियंत्रक, विधिक माप विज्ञान (नाप-तौल विभाग)