प्याज में बेतहाशा महंगाई के बाद राज्य सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने स्टॉक लिमिट तय कर दी है। प्याज पर स्टॉक लिमिट थोक कारोबारियों के लिए 500 किलो और कमीशन एजेंट के लिए 100 किलो तय किया गया है।
रायपुर. प्याज में बेतहाशा महंगाई के बाद राज्य सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने स्टॉक लिमिट तय कर दी है। प्याज पर स्टॉक लिमिट थोक कारोबारियों के लिए 500 किलो और कमीशन एजेंट के लिए 100 किलो तय किया गया है। छत्तीसगढ़ आवश्यक वस्तु व्यापारी आदेश के अंर्तगत सभी जिले में इसके कड़ाई से पालन करवाने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन राजधानी में खाद्य विभाग के अधिकारियों ने गोदामों के ओर दोबारा नहीं झांका है। इससे पहले खाद्य विभाग की टीम ने भनपुरी स्थित थोक आलू-प्याज के 22 दुकानों में जांच करने की बात कही थी, लेकिन यहां से किसी प्रकार की जमाखोरी अधिकारियों को नहीं मिली। प्याज की स्टॉकिंग के मामले में राज्य सरकार ने सख्त निर्देश दिए हैं कि जमाखोरी पाए जाने पर तुरंत कार्यवाही करना है। भनपुरी थोक आलू-प्याज व्यापारी संघ के अध्यक्ष अजय अग्रवाल ने बताया कि बाजार में अलग-अलग वैरायटी में प्याज उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसे लोग खरीद रहे हैं।
प्याज की कीमतें अब धीरे-धीरे कम होने की जानकारी मिल रही है। रविवार को शहर के शास्त्री बाजार, डूमरतराई और भनपुरी थोक बाजार में 50 रूपए किलो में भी अच्छा प्याज ग्राहकों को मिला। थोक कारोबारियों का कहना है कि प्याज की जितनी स्टॉकिंग है, बाजार में भी उतना प्याज भी नहीं बिक रहा है, जिसकी वजह से कीमतें नीचे जा रही है।
राज्य सरकार का कहना है कि छत्तीसगढ़ प्याज उत्पादक राज्य नहीं है। राज्य में प्याज की मासिक आवश्यकता 30000 टन है, वहीं राजधानी में औसतन हर दिन 50 टन प्याज की जरूरत है, लेकिन इस महंगाई की वजह से प्याज की खपत महज 3 से 4 टन रह गई है। ठंड के दिनों वैसे भी प्याज की खपत कम रहती है, जिसकी वजह से बाजार में उठाव काफी कम हो चुका है। थोक कारोबारियों का कहना है कि गर्मी के दिनों इस तरह प्याज की किल्लत होने पर कीमतें 150 से अधिक जा सकती थी। गर्मियों में ज्यादा डिमांड रहती है। छत्तीसगढ़ में प्याज की आपूर्ति दूसरे राज्यों पर निर्भर है।
खाद्य नियंत्रक अनुराग भदौरिया ने बताया कि गोदामों की जांच के लिए टीमों को दोबारा भेजा जाएगा। जमाखोरी पर जांच के लिए दिशा-निर्देश प्राप्त हुए हैं।