ग्राम तरीघाट से कुंडेल को जोडऩे वाली सडक़ त्रिकोणीय होने से वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मोड़ पर हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। वहीं रोहिना, सेम्हराडीह, रविनगर, कौंदकेरा, भेंडरी, रवेली, पंडीतरई, लोहरसी जैसे मोड़ वाली सडक़ पर संकेतक बोर्ड नहीं होने से यात्रियों को भटकना पड़ता है। मार्ग पर तीन रोड अलग -अलग होने से और खतरा बढ़ जाता है।
ग्राम तरीघाट से कुंडेल को जोडऩे वाली सडक़ त्रिकोणीय होने से वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मोड़ पर हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। वहीं रोहिना, सेम्हराडीह, रविनगर, कौंदकेरा, भेंडरी, रवेली, पंडीतरई, लोहरसी जैसे मोड़ वाली सडक़ पर संकेतक बोर्ड नहीं होने से यात्रियों को भटकना पड़ता है। मार्ग पर तीन रोड अलग -अलग होने से और खतरा बढ़ जाता है। अचानक किस मार्ग से कौन सी गाड़ी निकल रही है और इधर मेन रोड से कौन सी गाड़ी आ रही है, कोई समझ में नहीं आता। दिन-रात वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। इसके बावजूद भी प्रशासन द्वारा इन मोड़ो पर कोई संकेतक बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। कई स्थानों पर लगे संकेतक बोर्ड गायब हो गए हैं।
इन मार्गों से रोजाना सैकड़ों लोगों को किसी न किसी कार्य से गुजरना होता है। अब तो कुंडेलभाठा में धान खरीदी केंद्र चालू हो जाने से धान से भरे ट्रकों का आना.जाना शुरू हो चुका है। इस मार्ग से सैकड़ों छात्र-छात्राएं आते-जाते हैं। स्कूल भी मेन रोड पर है, पर यहां भी संकेतक बोर्ड नहीं लगा है।
दुर्घटनाओं पर लग सकता है विराम
भेंडरी, रवेली, सहसपुर और कसेरुडीह को जोडऩे वाले मोड, तरीघाट और कुंडेल को जोडऩे वाला मोड़, रोहिना, रविनगर व सेमरडीह को जोडऩे वाला मोड़, मुड़तरई-कोपरा जैसे कई मोड़ है, जो तीन मोड़ वाले मार्ग है> तीनों सडक़ों पर यदि संकेतक बोर्ड लगा दिए जाएं तो आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं पर काफी हद तक विराम लगाया जा सकता है। साथ ही स्कूली बच्चो के सुरक्षा के लिए भी स्कूल से थोड़ा दूर संकेतक बोर्ड लगाने से सावधानी हो सकती है।
ये हैं दुर्घटना के कारण
राजिम से बेलटुकरी, कौन्दकेरा और तरीघाट से लोहरसी, भेडरी, कुरुद तक की सडक़ काफी खराब और सकरी है। रोजाना बड़ी-बड़ी गाडिय़ों का आवागमन बना रहता है। ऐसे मे रोड सकरी व खराब होने के चलते रोजाना कोई ना कोई दुर्घटना होती रहती है। ज्यादतर दुर्घटना का शिकार दो पहिया चालकों की होती है। बड़ी गाड़ी पूरे रोड को घेर कर चलती है। ऐसे मे दोपहिये गाड़ी चालक अपना संतुलन खो बैठता है और दुर्घटना का शिकार हो जाता है। स्कूली बच्चे भी राजिम, कोपरा, लोहरसी, कौन्दकेरा पढऩे जाते हैंं। ऐसे में सकरी रोड और संकेतक बोर्ड न होना किसी बड़ी दुर्घटना को आमंत्रण दे रही है़।
इनका कहना है
सडक़ों की साफ-सफाई तथा दुर्घटना ना हो उसके लिए सभी सडक़ों पर संकेतक बोर्ड के लिए बजट बना के दे चुके हैं। विधायक द्वारा अधिकारियों को निर्देशत भी किया गया है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारी को पेज निर्माण के लिए भी बोल दिया गया है। कहीं-कहीं पर पेज निर्माण चालू भी हो चुका है और सडक़ों पर छोटे-छोटे गड्ढे को भरने के लिए भी कहा गया है।
- चंद्रशेखर साहू, जिला पंचायत सदस्य
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अभी इसका प्रस्ताव बन रहा है। पूरे रोड का बन रहा है। अभी कार्य पोखरा रोड पर चल रहा है। इस रोड का प्रस्ताव भेज रहे हैं। एक-डेढ़ माह के अंदर संकेतक बोर्ड लग जाएगा।
- माधो सिंग देवांगन, विभागीय इंजीनियर