
रायपुर@गुंजन परमार। Convocation Ceremony 2026: पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान और आयुष विश्वविद्यालय का चौथा दीक्षांत समारोह शुक्रवार को नेहरू मेडिकल कॉलेज के अटल बिहारी वाजपेयी ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। इस समारोह में राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, नई दिल्ली के राष्ट्रीय विशेषज्ञ पैनल के अध्यक्ष एवं दीक्षांत समारोह के अभिभाषक डॉ. वेदप्रकाश मिश्रा उपस्थित थे।
इस अवसर पर मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथी, मेडिकल बायोटेक, बीपीपी, एमपीटी, नर्सिंग, बीएएसएलपी सहित विभिन्न संकायों के 7545 ग्रेजुएट, 1645 पोस्ट ग्रेजुएट और 5 सुपर स्पेशलिटी विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। समारोह में छात्रों को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। खास बात यह रही कि गोल्ड मेडल के साक्षी 7 महीने के बच्चे से लेकर 81 साल की नानी रही।
रायपुर की डॉ. संयुक्ता तिवारी ने आयुर्वेद यूजी में यूनिवर्सिटी टॉप कर दो गोल्ड मेडल हासिल किए। वे बताती हैं कि यह उपलब्धि उनके पिता सूर्यकांत तिवारी के सपने को पूरा करने जैसा है। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उनके पिता ने पढ़ाई को प्राथमिकता दी। संयुक्ता का कहना है कि स्मार्ट वर्क और समय पर फोकस सबसे जरूरी है। पूरे साल बेसिक्स पर ध्यान देकर और अंतिम महीनों में पूरी मेहनत झोंककर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। अब उनका लक्ष्य पीजी कर आगे बढऩा है।
7 महीने के बेटे को गोद में लेकर पहुंची गोल चौक की रहने वाली डॉ. अंकिता एच ने एमडी आयुर्वेद पूरा कर गोल्ड हासिल किया। अंकिता ने बताया कि हिंदी न जानने से शुरुआत में दिक्कत हुई, लेकिन दोस्तों और शिक्षकों के सहयोग से उन्होंने सफलता पाई। शादी और बच्चे की जिम्मेदारी के बीच पढ़ाई संभालना चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन पति के सपोर्ट ने राह आसान की। मेरा लक्ष्य आयुर्वेद के जरिए मरीजों का बेहतर इलाज करना और लोगों को इसकी विशेषताओं के बारे में जागरूक करना है।
रायपुर की डॉ. अनुष्का दुबे ने ५ गोल्ड मेडल प्राप्त किए। वे कस्तुरबा मेडिकल कॉलेज मंगलोर से 36 घंटे की लगातार ड्यूटी पूरी करने के बाद सीधे फ्लाइट से समारोह में शामिल होने पहुंचीं। डॉ. अनुष्का ने पूरे छत्तीसगढ़ में स्टेट रैंक-1 हासिल की और ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनोकोलॉजी सहित कई विषयों में टॉप किया।
वे बताती हैं कि सफलता का राज नियमित कक्षाओं में उपस्थिति, स्वयं के नोट्स तैयार करना और लगातार उनका रिवीजन करना रहा। पढ़ाई के दौरान उन्हें परिवार का पूरा सहयोग मिला। हालांकि लंबे ड्यूटी आवर्स के कारण उन्हें कथकऔर परिवार के साथ समय बिताने जैसे शौक पीछे छोडऩे पड़े। वे कहती हैं कि मरीजों को स्वस्थ होकर लौटते देख जो संतोष मिलता है, वही उन्हें आगे बढऩे की नई ऊर्जा देता है। उन्हें इस समारोह समेत कुल १७ गोल्ड मेडल मिले हैं।
बिलासपुर की एस वैष्णवी ने ऑब्स-गायनी में गोल्ड मेडल हासिल किया। वे अपनी सफलता का श्रेय नियमित पढ़ाई, रिवीजन और क्लासेज अटेंड करने को देती हैं। खास बात यह है कि इस सफर में उनकी 81 वर्षीय नानी आर. कुप्पुचेल्लम का बड़ा योगदान रहा। वे बताती है कि परिवार के साथ रहते हुए नानी के प्यार और सपोर्ट ने उन्हें हमेशा मोटिवेट किया। वैष्णवी का कहना है कि लगातार मेहनत और परिवार का साथ हो तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
रायगढ़ की डॉ. पलक केजरीवाल को चार गोल्ड मेडल मिले। उन्होंने पूरे कोर्स में टॉप करने के साथ फाइनल ईयर और गल्र्स कैटेगरी में भी सर्वोच्च स्थान हासिल किया। पलक का मानना है कि पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि मजे के साथ करना चाहिए। वे मूवी, ट्रिप और दोस्तों के साथ समय भी निकालती थीं, लेकिन रोज कम से कम एक तय समय पढ़ाई के लिए जरूर देती थीं। उनका कहना है कि कंसिस्टेंसी ही असली मंत्र है हर दिन पढऩा जरूरी है, चाहे समय कम ही क्यों न हो।