Iran-Israel War: छत्तीसगढ़ से हर महीने 5 लाख टन चावल, वनोपज एवं अन्य खाद्य सामग्री का होता है, वहीं दो देशों के बीच जारी युद्ध के बाद मिडिल ईस्ट और अफ्रीकी देशों के रास्ते बंद हो गए हैं..
Iran-Israel War: छत्तीसगढ़ से हर महीने खाड़ी के देशों, आफ्रीकी और मीडिल ईस्ट में 5 लाख टन से ज्यादा के चावल एवं अन्य सामानों की आपूर्ति होती है। लेकिन, ईरान में हुए हमले के बाद कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। यहां से दुबई, ओमान और बहरीन के लिए भेजी जाने वाली शिपमेंट समुद्री और हवाई मार्ग बाधित होने से रुक गई है। वहीं, जो माल भेजा जा चुका था, वह भी रास्ते में अटका है। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य के अहम समुद्री रास्तों को रोकने से मालवाहक जहाजों का आवागमन रुक गया है।
ईरान में अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद से कारोबारी गतिविधियां ठप हो गई हैं। जिसके चलते पुराना भुगतान भी अटक गया है। कैट के एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य एवं ऑल इंडिया राइस एसोसिएशन एक्सपोर्ट फेडरेशन के छत्तीसगढ़ के उपाध्यक्ष डॉ. विजय गोयल ने बताया राज्य से हर महीने 5 लाख टन चावल दुबई के कारोबारियों के जरिए एक्सपोर्ट होता है। ईरान युध्द के कारण कारोबार ठप होने के कारण 1500 करोड़ रुपए भुगतान रुक गया है।
संभावित खतरे को देखते हुए अधिकांश लोग अपने मालवाहक पानी जहाज भेजने से कतरा रहे है। वहीं प्रतिटन 7000 रुपए का फ्रेड लिया जा रहा है। लड़ाई के खिंचने पर राज्य के साथ देश की इकॉनामी पर असर पडे़गा। उन्होंने बताया कि सोमवार को 140 अंतरराष्ट्रीय फ्लाइटों को कैंसिल किया गया है। अब पानी जहाजों पर रोक लगाई गई है।
ऑल इंडिया राइस मिल एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष योगेश अग्रवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ से दुबई, कुवैत, ओमान और खाडी़ के अन्य देशों के साथ ही आफ्रीकी देशों को हर साल 30 हजार लाख टन चावल भेजा जाता है। राज्य के 400 से ज्यादा राइस मिलर चावल का एक्सपोर्ट करते हैं। ईरान में हमले के बाद पूरी परिस्थिति बदल गई है। युध्द के लंबा खिंचने पर कारोबार प्रभावित होगा।
खरीदी का सीजन शुरू होते ही युध्द के चलते एक्सपोर्ट रुकने के नुकसान का सामना करना पड़ेगा। इसे देखते हुए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की गई है। मौजूदा तनाव के कारण निर्यातकों को भुगतान अटकने की चिंता है। एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (ईसीजीसी) के तहत बीमा होने के बावजूद युद्ध जैसी परिस्थितियों में जोखिम बढ़ जाता है।
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र से मुख्य रूप से इमली (खासकर मीठी और खट्टी इमली) का निर्यात खाड़ी देशों सहित दुनिया के लगभग 12 देशों में किया जाता है। इसके अलावा, महुआ, हर्रा, बहेड़ा, और अन्य लघु वनोपज भी विदेश भेजे जाते हैं। बस्तर सालाना लगभग 500 करोड़ रुपए का वनोपज कारोबार करता है। वन विभाग इस उत्पाद को पैकेजिंग कर संजीवनी मार्ट के माध्यम से भी बेचता है।
ईरान में हमले से वहां से आयात होने वाले सूखे मेवों पर हमले का सीधा असर पड़ा है। समुद्री और हवाई मार्ग प्रभावित होने से आयात बाधित होने से कीमतों में 10 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। इस समय हरा पिस्ता 1800 से 1900 रुपए प्रति किलो, पेशावरी पिस्ता 3000 से 3100 रुपए, अंजीर 850 से 900, केसर की एक ग्राम डिब्बी 250 से बढ़कर 280 रुपए हो गई है। कारोबार प्रभावित होने से बादाम, अखरोट और किशमिश के दामों में इजाफा होने की संभावना कारोबारियों ने जताई है। हालांकि इसकी आपूर्ति जम्मू-कश्मीर से होने के कारण उनमें फिलहाल स्थिरता बनी हुई है। वहीं रमजान के समय ईरानी खजूर की मांग सबसे अधिक रहती है। मांग बढ़ने और आपूर्ति प्रभावित होने पर कीमतों में इजाफा होगा।