आयकर विभाग की जांच छत्तीसगढ़ के कारोबारियों के 41 ठिकानों में पूरी हो गई है। जांच में आयकर विभाग को बड़े पैमाने पर ज्वैलरी और कैश मिले हैं।
रायपुर. आयकर विभाग की जांच कोयला, पॉवर प्लांट और रियल एस्टेट संचालकों के 41 ठिकानों में पूरी हो गई है। उनके रायपुर, बिलासपुर स्थित मुख्य कार्पोरेट दफ्तर और कोरबा की 9 फैक्ट्री में जांच चल रही है। आयकर विभाग ने 3 करोड़ 50 लाख की ज्वेलरी और 42 लाख रुपए को जब्त कर लिया है। 2 करोड़ 25 लाख रुपए के जेवरात और नकदी पहले बरामद किए जा चुके हैं।
आयकर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि छानबीन के दौरान कारोबारियों के 9 बैंक लॉकर, 66 लाख रुपए का केमिकल स्टॉक, करोड़ों रुपए के बेनामी लेनदेन और निवेश संबंधी दस्तावेज मिले है। टीम इसकी छानबीन करने में जुटी हुई है।
आयकर विभाग को कारोबारियों की इंडोनेशिया में फैक्ट्री का संचालन किए जाने संबंधी पेपर मिले है। इसकी जांच करने विदेश मंत्रालय और आयकर मुख्यालय को जानकारी भेजी गई है। बताया जाता है कि वहां कोयले का निर्यात किए जाने की जानकारी भी मिली है।
बेनामी कंपनी
कारोबारियों ने टैक्स चोरी करने के लिए कोलकाता में दो कमरों की कंपनी खोल रखी थी। इसे दस्तावेजों में मुख्य कार्पोरेट दफ्तर बताया गया था। लेकिन, वहां साफ-सफाई और देखरेख के लिए तीन कर्मचारी को काम पर रखा गया था। उन्हे दस्तावेजों में 15 बेनामी कंपनी का संचालक और मैनेजर बताया गया था।
वह कोयले की ढुलाई करने के लिए कोलकाता से किराए पर रेलगाडिय़ों के रैक दिलाने का काम करते थे। छापेमारी के दौरान आयकर विभाग को जांच के दौरान इसका पता चला। उन्होंने अपनी छानबीन पूरी करने के बाद रायपुर आयकर विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें कारोबारियों द्वारा किए गए पूरे फर्जीवाड़े का ब्यौरा दिया गया है।
संचालक गायब
आयकर विभाग के अफसर कारोबारी ग्रुप के प्रमुख संचालक के लौटने का इंतजार कर रहे है। बताया जाता है कि दबाव के बाद उसने मारिशस से लौटने का आश्वासन दिया था। लेकिन करोड़ों की गड़बड़ी उजागर होने के बाद उसने अपना मोबाइल बंद कर दिया है।