
रायपुर. मौसम में जैसे-जैसे बदलाव हो रहा है, वैसे-वैसे मौसमी बीमारियों ने भी दस्तक देना शुरू कर दिया है। स्वाइन फ्लू, जीका वायरस, जापानी इन्सेफलाइटिस तथा वेक्टर जनित रोगों के मरीज अस्पताल पहुंचने लगे हैं।
प्रदेश में स्वाइन फ्लू के संदिग्ध सैकड़ों मरीजों का उपचार सरकारी और निजी अस्पतालों में चल रहा है। वहीं, जापानी इन्सेफलाइटिस का कहर बस्तर के बीजापुर और दंतेवाड़ा जिले में सामने आए हैं। गत दिनों जापानी इन्सेफलाइटिस से तीन बच्चों के मौत का मामला सामने आया था।
प्रदेश में जीका वायरस का मरीज अब तक सामने नहीं आया है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने बीमारों को देखते हुए प्रदेशभर में अलर्ट जारी कर दिया है। डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में जीका के संदर्भ में अलर्ट रहने तथा सभी सरकारी अस्पतालों में समुचित दवाएं रखने के निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व भिलाई-दुर्ग समेत प्रदेश में डेंगू से करीब 55 लोगों ने दम तोड़ा था। अभी भी डेंगू के पचासों मरीजों का उपचार सरकारी और अन्य अस्पतालों में चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग अभी डेंगू पर नियंत्रण करने में जुटा ही था कि अन्य बीमारों ने मुश्किलें बढ़ा दी है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण
बुखार के साथ खांसी का आना, जुकाम, छीक आना, गले में खरास, आंखों में लाली और सांस लेने में कठिनाई
जीका वायरस के लक्षण
तेज बुखार, बदनदर्द, बेचैनी, आंखों में लालिमा, त्वचा पर लाल चकते, जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द
डेंगू के लक्षण
तेज बुखार, आंखों तथा सिर में दर्द, उल्टी, मांसपेशियों तथा हड्डियों में दर्द, त्वचा पर रैशेस
बीमारियों को लेकर प्रदेश के सभी सीएम को पत्र लिखा गया है। प्रदेश में सर्विलेंस सिस्टम को सक्रिय किया जाएगा तथा रैपिड रिस्पांस टीम स्थापित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
डॉ. आर.आर. साहनी, संचालक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग
मरीजों के लक्षण को देखकर बीमारी का अंदाजा लगाना काफी मुश्किल है। अस्पताल पहुंचने पर ही मरीजों की सही बीमारी की जानकारी लग सकती है।
डॉ. आरएल खरे, सहायक प्राध्यापक, जिला अस्पताल, मेडिसीन