आप बढ़ती महंगाई में अपने वाहन में पेट्रोल-डीजल डलवाते-डलवाते थक चुके होंगे। इसके बाद भी इनके दाम रुकने के नाम नहीं ले रहे हैं।
रायपुर. आप बढ़ती महंगाई में अपने वाहन में पेट्रोल-डीजल डलवाते-डलवाते थक चुके होंगे। इसके बाद भी इनके दाम रुकने के नाम नहीं ले रहे हैं। आज हम आपको बताते हैं कि कैसे पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ती है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राज्य में वसूले जा रहे २५ फीसदी वैट अलावा राज्य सरकार ग्राहकों से सरचार्ज भी वसूल रही है। इसकी वजह से पेट्रोल-डीजल की कीमतें और महंगी होती जा रही हैं। पेट्रोलियम डीलर्स से मिली जानकारी के मुताबिक राज्य में पेट्रोल में २ रुपए और डीजल में १ रुपए लगाया जा रहा है। राज्य सरकार ने राजस्व के चलते पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी से अलग रखा है। उल्लेखनीय है कि पेट्रोल-डीजल से राज्य सरकार को कुल राजस्व में हर साल 25 से 30 फीसदी राजस्व प्राप्त होता है।
आम लोगों और उद्योगों को राहत
सेल टैक्स बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष महेश शर्मा ने कहा कि पेट्रोल-डीजल में वैट करने से आम लोगों को लाभ होगा, वहीं उद्योगों के लिए यह बेहतर होगा। परिवहन क्षेत्रों में इसका बड़ा असर हो सकता है। वैट कम करने से राज्य सरकार को घाटा नहीं सहना पड़ेगा।
कम नहीं होगा राजस्व, बल्कि बढ़ेगा
पेट्रोल-डीजल में वैट कम करने के मामले में विशेषज्ञों का कहना है कि इससे राजस्व में कमी नहीं आएगी बल्कि वृद्घि होगी। अर्थशास्त्री अशोक पारख ने कहा कि पेट्रोल-डीजल में सबसे अधिक 25 फीसदी वैट वसूला जा रहा है। सरकार चाहे तो वैट या सरचार्ज कम कर सकती है, जिसके बाद कीमतों से ग्राहकों को राहत मिलेगी। वैट कम करने के बाद राजस्व में कमी नहीं बल्कि खपत बढऩे की वजह से वृद्घि होगी।
पेट्रोल-डीजल से 29 फीसदी राजस्व
वाणिज्यिक कर विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक पेट्रोल-डीजल से राज्य सरकार को 28 से 29 फीसदी राजस्व हासिल होता है। वित्तीय वर्ष 2016-017 में विभाग को प्रदेश में 11 हजार करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ था, जिसमें सिर्फ पेट्रोल-डीजल से 29 फीसदी यानी 3000 करोड़ से अधिक का राजस्व मिला।