
विनोद जैन/Land Sale Controversy: ग्राम कुर्रा की कथित आदिवासी सेवा भूमि की बिक्री को लेकर चल रहे विवाद में अब नया मोड़ आया है। भूमि विक्रेता नोखेलाल नगारची ने 3 अक्टूबर 2025 को शपथपूर्वक बयान दर्ज कराया है। अपने बयान में उन्होंने जमीन को फर्जी तरीके से बेचने के आरोप से इनकार किया है। उनका कहना है कि परिवार में विवाह और इलाज से जुड़े खर्च के लिए पैसों की जरूरत थी, इसलिए उन्होंने जमीन बेचने की सहमति दी थी।
मामला ग्राम कुर्रा की खसरा नंबर 941 की भूमि से जुड़ा है। इस जमीन के कथित फर्जी तरीके से विक्रय और हस्तांतरण को लेकर शिकायत की गई है। शिकायत के बाद अब विक्रेता का बयान सामने आया है। नोखेलाल नगारची ने अपने शपथपूर्वक बयान में कहा कि जमीन को फर्जी तरीके से बेचने की बात सही नहीं है। उनके अनुसार खरीदार ने जमीन खरीदने की इच्छा जताई थी। परिवार की आर्थिक जरूरतों को देखते हुए उन्होंने जमीन बेचने के लिए अपनी सहमति दी।
नोखेलाल के अनुसार परिवार में विवाह और चिकित्सीय जरूरतों के लिए राशि की आवश्यकता थी। इसी वजह से उन्होंने अपनी भूमि के विक्रय पर सहमति दी। उनका कहना है कि यह बिक्री किसी फर्जी तरीके से नहीं की गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि पंजीयन के बाद नामांतरण समेत अन्य राजस्व प्रक्रिया की जिम्मेदारी खरीदार ने खुद लेने की बात कही थी। इसी भरोसे पर उन्होंने अपने नाम भूमिस्वामी हक में दर्ज भूमि का विक्रय पंजीयन कराया।
शपथपूर्वक बयान में नोखेलाल ने कहा कि उन्हें अपनी जाति नगारची के अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में आने की जानकारी नहीं थी। इसी वजह से भूमि हस्तांतरण से जुड़े नियमों की जानकारी होने की बात से भी उन्होंने इनकार किया है। उन्होंने बताया कि वह और उनके परिवार के सदस्य केवल साक्षर हैं और कानून की पूरी जानकारी नहीं रखते। पंजीयन की प्रक्रिया और उससे जुड़ी जिम्मेदारियों को लेकर वे खरीदार की बात पर निर्भर थे।
दूसरी ओर, इसी भूमि को लेकर तहसील कार्यालय की ओर से नवापारा थाना प्रभारी को पत्र भेजा गया है। पत्र में भूमि के कथित फर्जी हस्तांतरण, कूटरचना और धोखाधड़ी सहित सक्षम अनुमति के बिना भूमि हस्तांतरण के आरोपों का उल्लेख किया गया है। तहसील कार्यालय की ओर से संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
एक तरफ विक्रेता अपने शपथपूर्वक बयान में जमीन को परिवार की जरूरत के कारण स्वेच्छा से बेचने की बात कह रहा है। दूसरी तरफ तहसील कार्यालय ने भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोपों का उल्लेख करते हुए पुलिस कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब पुलिस जांच में यह महत्वपूर्ण होगा कि खसरा नंबर 941 की भूमि का हस्तांतरण किस प्रक्रिया के तहत हुआ।
साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि जमीन की बिक्री और नामांतरण के दौरान संबंधित नियमों और जरूरी अनुमतियों का पालन किया गया था या नहीं। पुलिस राजस्व रिकॉर्ड, पंजीयन दस्तावेज और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर मामले की जांच करेगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भूमि हस्तांतरण में वास्तव में किसी नियम का उल्लंघन हुआ था या नहीं।