राजधानी में पीलिया के कहर से पहले ही लोग परेशान थे और अब दहशत फैलाने पानी वाला कीड़ा भी आ गया है। आप भी रहें सावधान
गर्मी के शुरू होते ही पीलिया का कहर चारों ओर फैल गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह है गंदा पानी जो कि दिखने में साफ है मगर पुरी तरह से प्योरिफाई नही है। साफ पानी के सेम्पल लेने पर भी यह कीड़ा निकल आया तो सोचिए आप कितने सुरक्षित है। इस फोटो में आपको जो पानी वाला कीड़ा दिखाई दे रहा है इसका साइंटिफीक नाम लेप्टो सेफलस है। पानी भरते वक्त अगर आपके साथ एेसा होता है तो इसे नजरअंदाज न करें।
रायपुर . छत्तीसगढ़ में एक महिने में ही पीलिया के प्रकोप से पांच लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। नगर निगम की जल आपूर्ति सवालों के घेरे में बनी हुई है। बीते तीन दिनों से भाठागांव इलाके में नल के पानी से एक बेहद खतनाक कीड़ा निकल रहा है। यह पारदर्शी कीड़ा है, जिसका नाम वैज्ञानिक भाषा में लेप्टो सेफलस है। यह ईलस मछली का लार्वा होता है। भाठागांव की मोनाली गुहा घर में लगे नल से पानी भर रही थी उसी समय यह कीड़ा निकला तो चौंक पड़ी। कुछ लोगों ने इसे मछली बताया लेकिन पड़ताल करने पर पता चला कि यह एक जहरीला कीड़ा है।
हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त कोर्ट कमिश्ररों की टीम ने राजधानी के पीलिया प्रभावित क्षेत्रों में फिर से दौरा किया। जांच रिपोर्ट में 223 सैंपल में से 104 सैंपल पॉजीटिव पाया गया है। पीलिया का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जिसकी जांच-पड़ताल से लेकर पर्याप्त स्वास्थ्य शिविर आदि की अभी भी कमी दिखाई पड़ रही है।
शहर के सामाजिक कार्यकर्ता नितिन सिंघवी ने बताया कि मुकेश देवांगन द्वारा जनहित याचिका दायर करने उपरांत, रायपुर तथा बिलासपुर नगर निगमों में प्रदूषित पानी पिलाएं जाने के संबंध में हार्टकोर्ट ने 3 सदस्यीय न्यायमित्रों की टीम गठित की थी, जिनमें एडवोकेट मनोज परांजपेय, ऐडवोकेट अमृतोदास, एडवोकेट सौरभ डांगी शामिल है।
टीम ने शनिवार को मोवा के नहरपारा का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान कोर्ट कमिश्नर मृतक प्रेम यादव के घर भी गये। प्रेम यादव की पत्नी द्वारा बताया गया कि पीलिया खून जांच की रिपोर्ट सेम्पल देने के चार दिनों बाद दी गई और प्रेम यादव शराब नहीं पीते थे, उनकी मृत्यु अस्पताल में हुई।
मोनाली पीने के लिए नल से पानी भर रही थी । इस दौरान तीन कीड़े पानी के बर्तन में नजर आए। वार्डवासी नल के पानी का उपयोग पेयजल के रूप में भी करते हैं, लेकिन नल से कीड़े निकलने के बाद अब पीने के लिए बाहर हेंडपंप से पानी लाकर उपयोग कर रहे हैं। कीड़ों के कारण पेट से संबंधित संक्रामक बीमारियां फैल रही है। निगम द्वारा पानी टंकी सफाई में ध्यान नहीं दिए जाने के कारण ही पानी में कीड़े आ रहे हैं।
कोर्ट कमिश्नर की टीम मोवा क्षेत्र में लगाये गये स्वास्थ्य शिविर में भी पहुंचे, जहां बताया गया कि आज तक लिये गये कुल 223 सेम्पल लिये गये, जिनमें से 104 में पीलिया पाया गया। केम्प में बताया गया कि प्रेम यादव की रिपोर्ट खून सैम्पल लेने के 24 घण्टे में दे दी गई थी। कोर्ट कमिश्नर ने इस मौके पर रायपुर नगर निगम के जल आपूर्ति विभाग के अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं आ सके।
शहर में नलों के माध्यम से नगर निगम द्वारा पेयजल आपूर्ति किया जाता है। लेकिन पिछले कुछ समय से नल के पानी में साथ कीड़े आने की शिकायत बढ़ गई है। बीते दिनो राजातालाब, बैरन बजार, मोवा में नल के पानी में कीड़ा निकलने से लोग आपूर्ति वाले पानी को पीने से बचने लगे हैं, अधिकांश लोगों ने घरों में आरो और वाटर फिल्टर लगवा लिया है लेकिन गरीब तबके के लोग इस पानी को पीने के लिए मजबूर हैं।
यह लार्वा तीन माहिने से एक साल तक का होता है। यह बेहद खतरनाक होता है इसका पारदर्शी रक्त जहरीला होता है। जो मनुष्य के किडनी को बेहद प्रभावित कर सकता है। जिससे व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह लार्वा साफ और नदी के पानी में मिलता है।
टीम ने आंबेडकर अस्पताल से पीलिया संबंधित आकड़े लिए, जिसमें अप्रैल 2018 में आंबेडकर अस्पताल में छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से आए 31 मरीज पीलिया-हैपिटाईटिस के भर्ती हुए, जिनमें से 2 की मृत्यु हो गई। मृतकों में जगदीश शर्मा मनेन्द्रगढ़ (मृत्यु 14 अपै्रल) तथा अल्का 28 वर्ष पति धनंजय लोधीपारा शामिल है जिसकी मृत्यु 9 अप्रैल को हुई। रेखा त्रिपाठी का 13 अप्रैल को स्थांतरित होना बताया गया।
कोर्ट कमिश्नरों की राय में पीलिया प्रभावित क्षेत्रों के उन सभी नागरिकों को जिन्हें पीलिया के प्रांरभिक लक्षण दिखाई दे रहें है,उन्हें शीघ्र खून जांच करवानी चाहिए एवं झाड़-फूंक छोडक़र डाक्टर की सलाह का पूर्ण पालन करना चाहिये। कोर्ट कमिश्नरों के साथ नितिन सिंघवी भी दौरे में शामिल रहे।
रायपुर नगर निगम के आयुक्त रजत बंसल ने कहा कि निगम द्वारा सभी वार्डों में शिविर लगा कर पानी के सैपल लिए जा रहे हैं। जिस वार्ड की शिकायत है सैंपल लेकर जांच की जाएगी।