
Lok Sabha Election 2024 : विधानसभा चुनाव में बम्पर जीत के बाद प्रदेश भाजपा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में अब निगम-मंडल और आयोग में पद पाने को लेकर होड़ मची हुई है। सूत्रों के अनुसार लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा सरकार पार्टी की अनुशंसा पर निगम-मंडलों-आयोग में खाली हुए राजनीतिक पदों पर कुछ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की नियुक्त कर सकती है।
बताया जाता है कि संगठन स्तर पर 10 से 15 निगम-मंडलों और आयोग में नियुक्ति की कवायद चल रही है, ताकि लोकसभा चुनाव में कुछ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को उपकृत कर बाकी कार्यकर्ताओं को भी चुनाव बाद मिलने की आस में लोकसभा चुनाव में जमकर मेहनत करें।
मंत्रियों के आगे-पीछे लगा रहे चक्कर
निगम मंडलों-आयोग में पद पाने के लिए कुछ पदाधिकारी और कार्यकर्ता साय सरकार के मंत्रियों के बंगलों और उनके ऑफिसरों के चक्कर लगाना शुरू कर दिए हैं। यही कारण है कि विधानसभा चुनाव तक कभी गुलजार रहने वाले जिला भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर और प्रदेश भाजपा कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में अब भीड़ नदारद हो गई है। जिस दिन बड़ी बैठक या फिर दिल्ली से वरिष्ठ नेता आते हैं, उसी दिन ही पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की भीड़ नजर आती है।
पूर्व मंत्री और विधायक भी दावेदार
सूत्र बताते हैं कि विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद मंत्री पद नहीं मिलने पर कुछ पूर्व मंत्री अब निगम-मंडल या फिर आयाेग में ही अध्यक्ष पद को लेकर संगठन के बड़े नेताओं के पास जुगाड़ लगाना शुरू कर दिए हैं। इसमें कुछ पूर्व मंत्री और विधायक भी शामिल हैं।
फ्रंट लाइन वाले पदाधिकारियों को पहली प्राथमिकता
बताया जाता है कि भाजपा संगठन विधानसभा चुनाव में फ्रंट लाइन में रहकर पार्टी के लिए कार्य करने वाले विभिन्न मोर्चा-प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों को पहली प्राथमिकता दे सकती है। क्योंकि कुछ ऐसे पदाधिकारी भी थे, जिन्होंने विधानसभा चुनाव में टिकट की दावेदारी की थी। पार्टी ने टिकट न देकर चुनाव कार्य करने को कहा था। कुछ पदाधिकारियों के प्रभार वाले क्षेत्र में भाजपा को बम्पर जीत मिली हैं, इसलिए निगम-मंडलों और आयाेग में पद को लेकर उनकी स्वभाविक दावेदारी बन गई है।