Makar sankranti: पंडितों के अनुसार 15 दिसंबर से मकर संक्रांति तक खरमासकाल की वजह से शुभ कार्यों में रोक थी। अभी तक सूर्य धनु राशि में थे, परंतु अब उस राशि को बदलकर मकर राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं।
Makar sankranti: सूर्यदेव अपनी राशि और दिशा दोनों बदल रहे हैं। धर्मशास्त्र के अनुसार जब दक्षिणायन से सूर्य उत्तरायणन होकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तभी मकर संक्रांति मनाई जाती है। मंगलवार को दोपहर 3.36 बजे सूर्यदेव धनु राशि छोड़ देंगे। इसके बाद ही पुण्य स्नान का महत्व है। यह संयोग पुण्य स्नान, दान के लिए विशेष माना गया है। इसलिए इस दिन महाकुंभ का पहला शाही स्नान है। इसके साथ ही पिछले एक महीने से बंद मांगलिक कार्य भी प्रारंभ हो जाएंगे।
पंडितों के अनुसार 15 दिसंबर से मकर संक्रांति तक खरमासकाल की वजह से शुभ कार्यों में रोक थी। अभी तक सूर्य धनु राशि में थे, परंतु अब उस राशि को बदलकर मकर राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं।
शंकराचार्य आश्रम के ज्योतिषि डॉ. इंदुभवानंद महाराज के अनुसार सूर्य के राशि परिवर्तन योग से देवताओं का दिन और दैत्यों की रात्रि प्रारंभ हो जाती है। यह स्थिति अगले छह महीने तक रहेगी।
सत्ता संघर्ष, वन्य जीवों को नुकसान, उन्नति का मार्ग भी इस बार मकर संक्रांति पीले वस्त्र में माथे पर कुमकुम का लेपन कर शेर पर सवार हो कर आ रही है। पंडितों के अनुसार संक्रांति का शेर की सवारी वन्य जीवों के नुकसान का संकेत हैं। राजाओं यानी, सत्ता घोड़ा होने से महंगाई कम होने और उन्नति का मार्ग प्रशस्त्र होने का ज्योतिषीय संकेत हैं।
ज्योतिषी डॉ. इंदुभवानंद के अनुसार नए घर में प्रवेश का पहला मुहूर्त 6 फरवरी को है। इसके साथ ही कुल 35 मुहूर्त इस बार गृह प्रवेश के बन रहे हैं। विवाह, उपनयन और मुंडन संस्कार के कुल 75 मुहूर्त है इस साल। पहला वैवाहिक मुहूर्त 16 जनवरी से प्रारंभ हो रहा है।