रायपुर

शादी की तैयारी में जुटा था परिवार, फिर हुआ कुछ ऐसा की खुशियां बदली मातम में

मौत से पूरा परिवार गमगीन हो गया
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Updated: 13 Jun 2018, 12:16 PM IST
cg news
शादी की तैयारी में जुटा था परिवार, फिर हुआ कुछ ऐसा की खुशियां बदली मातम में

रायपुर. राजधानी में पीलिया का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब तक राजधानी में पीलिया के प्रकोप से 7 लोगों की हो चुकी हैं। इसके प्रकोप से रामनगर क्षेत्र के 32 वर्षीय गजराज सिंह नामक एक युवक ने अपनी जान गंवा दी है।

मृतक के भाई पुखराज सिंह राजपूत (राजू) ने पत्रिका को बताया कि उनकी शादी तय हो गई थी और कुछ ही दिनों में शादी की तारीख निश्चित होने वाली थी। एेसे में उनकी मौत से पूरा परिवार गमगीन हो गया।

परिजनों का कहना है कि उनका इलाज पिछले दो सप्ताह से एक निजी अस्पताल में चल रहा था, जहां से उन्हें शनिवार रात केस बिगडऩे पर आंबेडकर अस्पताल भेजा गया। कैजुअल्टी में प्राथमिक उपचार करने के बाद उन्हें वार्ड में शिफ्ट किया गया, जहां उनकी दोपहर लगभग ३ बजे मौत हो गई। अब तक राजधानी में 7 लोगों की मौत पीलिया के प्रकोप से हो चुकी है। वहीं रामनगर क्षेत्र में यह दूसरी मौत है, जबकि शेष मृतक मोवा क्षेत्र के हैं।

पीलिया प्रभावित क्षेत्रों में मोवा, बीएसयूपी, भाठागांव, रामनगर, रामकुंड जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में हाईकोर्ट के आदेशानुसार कमिश्नरों की टीम ने भी भ्रमण किया था। जहां उन्होंने सभी क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगाए थे। गुढि़यारी अशोक नगर सहित अन्य क्षेत्रों में पानी से कीड़े निकलने की शिकायत आई है।

*250 से अधिक आए मरीज, इलाज अब भी जारी

रायपुर के सीएमएचओ, डॉ. केएस शांडिल्य ने बताया मामले की सूचना नहीं है, जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि उनकी मौत का असल कारण क्या है।

आंबेडकर अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी, शुभ्रा सिंह ने बताया मरीज को ९ जून की देर रात अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी किडनी और लीवर ने काम करना बंद कर दिया था। इस वजह से उनके बाकी अंगों ने काम करना बंद कर दिया और उसकी मौत हो गई।

पीलिया के प्रकोप से अबतक हुई मौतों में पानी को ही दोषी पाया गया है। पानी में इ-कोलाइ की पुष्टि पर्यावरण संरक्षण मंडल ने भी अपनी शुरुआती रिपोर्ट में की थी। मामले में सीएमएचओ का कहना है कि जांच किए बिना मौत की पुष्टि कर पाना संभव नहीं है। उन्हें पीलिया पानी की खराबी से हुआ था या किसी अन्य वजह से यह जांच के बाद ही पता चल पाएगा।

निगम पूरे मामले में शुरू से ही लापरवाह बना हुआ है। 2014 में हुई मौतों के बाद हाईकोर्ट में परिजनों की शिकायत के बाद सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूरे शहर में शुद्ध पेयजल मुहैया कराने की सलाह के साथ और भी कई निर्देश दिए थे। इस निगम ने दिखावे के लिए कुछ पाइप लाइनों को तो नालियों से बाहर किया, जबकि अन्य कार्य कागजों तक ही सीमित रह गए।

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