रायपुर

सरकारी इमारतों के लिए नया रायपुर में 6 वर्षों से हो रहा प्रजेंटेशन, एक भी टेंडर फाइनल नहीं

इन बीते वर्षों में विधानसभा भवन से लेकर मुख्यमंत्री निवास, राजभवन सहित अन्य इमारतों का टेंडर फाइनल नहीं हुआ है

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Aug 24, 2018
सरकारी इमारतों के लिए नया रायपुर में 6 वर्षों से हो रहा प्रजेंटेशन, एक भी टेंडर फाइनल नहीं

रायपुर . नया रायपुर में अलग-अलग सरकारी इमारतों के लिए पिछले ५-६ वर्षों से प्रजेंटेशन और कन्सल्टेंट की नियुक्तियों का दौर जारी है, लेकिन इन बीते वर्षों में विधानसभा भवन से लेकर मुख्यमंत्री निवास, राजभवन सहित अन्य इमारतों का टेंडर फाइनल नहीं हुआ है।

विधानसभा भवन निर्माण के लिए ५ वर्षों से कवायद चल रही है, वहीं १० वर्षों से अलग-अलग डिजाइन के लिए प्रजेंटेशन दिया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी ने अब जाकर इसके लिए मॉडल फाइनल किया है। आर्किटेक्ट द्वारा डिजाइन फाइनल होने के बाद अब टेंडर निकाला जाएगा। यही स्थिति मुख्यमंत्री और राजभवन की भी है।

नया रायपुर में सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट, अर्फोडेबल हाउसिंग, फूड जोन, इंटरटेनमेंट जोन, एजुकेशन, सेंट्रल पार्क आदि प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए कई बार प्रजेंटेशन दिया गया, वहीं बार-बार टेंडर आमंत्रित करना पड़ा। सीबीडी के कई ऑफिस, दुकान, फूड जोन, इंटरटेनमेंट जोन में कोई निवेशक नहीं नहीं आए, जिसके कारण प्रोजेक्ट को सफलता नहीं मिल पाई।

नया रायपुर में बेहतर रेस्टोरेंट और मनोरंजन के लिए कोई साधन नहीं है। इस संबंध में एनआरडीए ने देश की बड़ी मल्टीप्लेक्स कंपनी से बात की, लेकिन सकारात्मक असर नहीं आ सका। स्वास्थ्य, शिक्षा, मनोरंजन और खान-पान को लेकर एनआरडीए के प्रयासों में बड़ी सफलता नहीं मिल सकी है। जनरल मेडिसीन को लेकर एक भी निजी क्लिनिक यहां नहीं है।

नया रायपुर में अलग-अलग सेक्टरों में कन्सल्टेंसी की नियुक्ति में ही हाउसिंग बोर्ड, एनआरडीए, पीडब्ल्यूडी ने लाखों रुपए फूंक दिए। मंत्रालय और सचिवालय निर्माण से लेकर विधानसभा के नए भवन का मॉडल फाइनल होने तक की स्थिति में अब तक दिल्ली, मुंबई और रायपुर की कंपनियों पर खूब खर्चें किए गए। अधिकारियों ने मॉडल देखने के लिए राजस्थान, गुजरात, केरल आदि राज्यों का दौरा भी किया।

नया रायपुर में जमीन लेकर निर्माण नहीं करने वाले सरकारी और निजी एजेंसियों पर एनआरडीए ने फिर छूट दे दी है। नियमों के मुताबिक जमीन आवंटन के ३ साल के भीतर अधोसंरचना निर्माण को पूरा करना था। दो साल पहले एनआरडीए ने इस संबंध में सख्ती दिखाई थी, जिसमें ७२ में सिर्फ २० संस्थानों ने निर्माण कार्य शुरू किया था। देरी से निर्माण पर २० फीसदी पेनाल्टी का भी पालन नहीं किया जा रहा है।

पीडब्ल्यूडी के इएनसी डी.के. प्रधान ने कहा कि जिस प्रोजेक्ट की अनुमति पीडब्ल्यूडी को मिली है। इस संबंध में डिजाइन फाइनल होने के बाद टेंडर निकालने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसमें लेटलतीफी नहीं होगी। तकनीकी पहलुओं की जांच-पड़ताल के बाद टेंडर में पात्र कंपनियों को काम सौंपा जाएगा।

Published on:
24 Aug 2018 10:06 am