अस्पताल में इलाज के बाद बच्चों को महिला एवं बाल विकास ने मातृछाया में भेज दिया गया है। जन्म के समय बच्चे का कम वजन (1.6 किलोग्राम) होने की वजह से मां को विशेष देखभाल करने की सलाह दी गई।
रायपुर. माता-पिता से उपेक्षित एक नवजात को नया जीवन मिला है। कालीबाड़ी जिला अस्पताल में पैदा हुए इस नवजात को माता-पिता ने अस्पताल में ही छोड़ दिया था क्योंकि उसे उपचार की जरूरत थी। अस्पताल में इलाज के बाद बच्चों को महिला एवं बाल विकास ने मातृछाया में भेज दिया गया है। रायपुर के कुष्ठ बस्ती निवासी सुखी राम और काम्या (परिवर्तित नाम) के घर राजा (परिवर्तित नाम) ने जन्म लिया। बच्चे की मां कुष्ट पीडि़त और पिता मानसिक रोगी है। जन्म के समय बच्चे का कम वजन (1.6 किलोग्राम) होने की वजह से मां को विशेष देखभाल करने की सलाह दी गई। माता-पिता की विशेष काउंसिलिंग करने के बाद बच्चे को एसएनसीयू में ही रखकर इलाज की सलाह दी गई परंतु दोनों नहीं मानें और बच्चे को अस्पताल में छोड़कर चले गए। न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) के इंचार्ज डॉ. निलय मोझरकर के मुताबिक अस्पताल में कम वजन वाले नवजात राजा के समान ही कम वजन वाले कई अन्य बच्चों को विशेष देखभाल से ठीक किया जा रहा है।
ऐसे होती है विशेष देखभाल
एसएनसीयू में विशेष नर्सिंग स्टॉफ और 24 घंटे शिशुरोग विशेषज्ञ उपलब्ध रहते हैं। 24 घंटे शिशु के स्वास्थ्य पर नजर रखी जाती है। शिशु को कब, किस की जरूरत है, यह वे बेहतर जानते हैं। अर्ध विकसित शिशु भी यहां जीवन पाते हैं।
नवजात में रहती हैं समस्याएं
शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. निलय मोझरकर ने बताया कि बच्चों को बेहतर इलाज के लिए रेडियंट बेबी वार्मर में रखा जाता है। वजन बढ़ाने के लिए 1 से 1.50 किग्रा के शिशु को बेबी वार्मर में करीब 20 दिन रखा जाता है। किसी भी शिशु का औसत वजन न्यूनतम 2 किग्रा होना चाहिए। समय से पूर्व जन्में बच्चे या कम वजन वाले बच्चों में सांस की तकलीफ, झटके आना, पीलिया सहित अन्य बीमारी आमतौर पर देखी जाती है।
हमें जब भी सूचना मिलती है, हमारी टीम तत्पर होकर ऐसे बच्चों को आश्रय दिलाती है। कालीबाड़ी अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों की देखभाल से बच्चा मातृछाया में स्वस्थ्य है।
अशोक कुमार पांडेय, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग