
रविवि की स्कॉलर टिकेश्वरी (Photo Patrika)
Chhattisgarh Local Vegetables: @अनुराग सिंह। छत्तीसगढ़ की भाजियां सेहत का खजाना हैं। इनमें पालक, लाल भाजी और विदेशी हरी पत्तेदार सब्जियों से ज्यादा विटामिन पाया जाता है। यह बात वैज्ञानिक विश्लेषण से सामने आई है। पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ स्टडीज़ इन केमिस्ट्री की रिसर्च स्कॉलर टिकेश्वरी की रिसर्च से यह पता चलता है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पारंपरिक खाद्य पदार्थ पोषण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनका नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के खाद्य नमूनों में विटामिनों का निर्धारण विषय पर अपना रिसर्च प्रो. कमलेश कुमार श्रीवास के निर्देशन में किया है। यह शोधपत्र अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका अमेरिकन कैमेकल सोसायटी और रॉयल सोसायटी ऑफ कैमेस्ट्री के जर्नलों में प्रकाशित हो चुका है।
प्रो. श्रीवास ने बताया कि अध्ययन में यह जानना था कि छत्तीसगढ़ की स्थानीय खाद्य सामग्री पोषण की दृष्टि से कितनी समृद्ध है और यह स्वास्थ्य के लिए किस प्रकार लाभकारी हो सकती है। वर्तमान समय में लोग आधुनिक एवं विदेशी खाद्य पदार्थों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, जिसके कारण पारंपरिक भोजन और स्थानीय भाजियों का उपयोग लगातार कम होता जा रहा है।
शोधार्थी टिकेश्वरी ने बताया कि शोध में छत्तीसगढ़ की भाजी अमारी, बोहार, चौलाई , चुनचुनिया, चरोटा, चेच, करमत्ता, कुसुम, कांदा, लाकड़ी, मेथी, प्याज, पोई, पटवा एवं बथुआ के साथ लाल, पालक भाजियों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया हैं। विशेष रूप से विटामिन बी1 (थायमिन), बी2 (राइबोफ्लेविन), बी3 (नायसिन), बी6 (पाइरिडॉक्सिन) और बी9 (फोलेट) की मात्रा का परीक्षण किया गया है। आधुनिक विश्लेषणात्मक तकनीकों जैसे हाई परफॉर्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी (एचपीसीएल) और नैनोपार्टिकल आधारित सेंसर तकनीकों का उपयोग किया गया है।
प्रो. श्रीवास ने बताया कि अध्ययन के अनुसार बथुआ में विटामिन बी₁ की सर्वाधिक मात्रा 0.85 एमजी/100 ग्राम और विटामिन बी3 की सर्वाधिक मात्रा 2.64 एमजी/100 ग्राम पाई गई। वहीं, कुसुम में विटामिन बी2 की मात्रा 0.44 एमजी/100 ग्राम एवं विटामिन बी6 की मात्रा 0.64 एमजी/100 ग्राम दर्ज की गई। साथ ही बोहार में विटामिन बी₉ (फोलेट) की मात्रा सबसे अधिक 0.08 एमजी/100 ग्राम पाई गई। ये विटामिन शरीर की ऊर्जा, तंत्रिका तंत्र की मजबूती, रोग प्रतिरोधक क्षमता, त्वचा स्वास्थ्य और रक्त निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
अमारी : आयरन और विटामिन सी का समृद्ध स्रोत, हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ बनाए रखने में सहायक, ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करता है।
बोहार : यह आयरन, फाइबर और आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, यह भाजी पाचन में सहायता करती है और शरीर को ठंडा रखने में भी सहायक है।
करमत्ता : यह पत्तेदार सब्जी रक्तचाप को कम करने, कैंसर से लड़ने की क्षमता प्रदान करने, दृष्टि सुधारने और त्वचा रोगों का इलाज करने में सक्षम है।
पोई : अल्सर रोधी, एंटीऑक्सीडेंट, साइटोटॉक्सिक, जीवाणुरोधी, किडनी की रक्षा करने वाले और घाव भरने वाले गुण होते हैं।
चौलाई : दर्द निवारक, ज्वरनाशक, अल्सर रोधी, कोलेस्ट्रॉल रोधी, अस्थमा और यौन रोगों में सहायक होती है।
चुनचुनिया : सूजनरोधी, शुद्धिकरण करने वाला, ज्वरनाशक और शीतनाशक होने के साथ-साथ इसका उपयोग सांप के काटने के इलाज में भी किया जाता है।
Published on:
22 May 2026 08:19 am
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
