खेल एवं युवा कल्याण विभाग में लगभग 15 पदों पर सरकारी सेवकों की प्रतिनियुक्ति के जरिए भर्ती के लिए जमकर लेन-देन के आरोप सामने आए हैं।
राजकुमार सोनी/रायपुर. खेल एवं युवा कल्याण विभाग में लगभग 15 पदों पर सरकारी सेवकों की प्रतिनियुक्ति के जरिए भर्ती के लिए जमकर लेन-देन के आरोप सामने आए हैं। फिलहाल उपसंचालक के एक पद के लिए आवेदन करने वाले बिलासपुर के गौरेला की बस्ती विद्यालय में पदस्थ व्यायाम शिक्षक संजय कुमार पाठक ने दो अफसरों पर पांच लाख रुपए मांगने का आरोप लगाकर सनसनी फैला दी है।
व्यायाम शिक्षक का कहना है कि खेल विभाग के उपसंचालक ओ.पी. शर्मा और सहायक संचालक राजेंद्र डेकाटे ने पहले तो वरिष्ठ अफसरों की सेवा के नाम पर भारी-भरकम रकम की मांग की और अब शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बना रहे हैं। इधर खेलमंत्री भैयालाल राजवाड़े का कहना है कि उन्हें किसी भी अभ्यर्थी की तरफ से शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन यह हकीकत हैं कि उनके विभाग में कई सालों से घाघ लोग बैठे हुए हैं, जो किसी भी काम को अंजाम दे सकते हैं। मंत्री ने कहा कि अभ्यर्थी की शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले की पड़ताल की जाएगी और जो भी दोषी होगा, उस पर कार्रवाई होगी।
यह है मामला
खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने इसी साल 24 मार्च को मैदानी इलाकों में खोले जाने वाले कार्यालयों पर काम करने लिए सरकारी शिक्षकों और अफसरों से आवेदन मंगवाए थे। इस भर्ती प्रक्रिया में व्यायाम शिक्षक संजय कुमार पाठक ने भी अपनी हिस्सेदारी दर्ज की, लेकिन उनका अनुभव बेहद कड़वा रहा। मुख्यमंत्री सहित अन्य सांविधानिक संस्थाओं को भेजी गई अपनी शिकायत में पाठक ने लिखा है, 'जब मैं दस्तावेज परीक्षण के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग में उपस्थित हुआ, तो खेल विभाग के सचिव प्रसन्ना आर. और खेल संचालक मौजूद थे।
इन दोनों अफसरों ने मेरी आंखों के सामने एक अभ्यर्थी संजय बिसेन को यह कहकर लौटा दिया कि उपसंचालक पद के लिए उनका वेतनमान कम है, जबकि दूसरे प्रत्याशी मनोज राय भी यह कहते हुए खारिज कर दिए गए कि वे योग्य नहीं हैं। उपसंचालक पद के लिए केवल दो प्रत्याशी शेष रह गए थे। एक मैं था और दूसरे सुशील मिश्रा। जब मेरी बारी आई, तो मैंने देखा कि परीक्षण प्रपत्र पर पेंसिल से नंबर दिए जा रहे हैं। मुझे शक हुआ कि नंबर बदले जा सकते हैं। खैर... अनुभव के आधार पर मुझे 81 नंबर दिए गए और परीक्षण प्रपत्र पर मेरे हस्ताक्षर ले लिए गए।
और फिर मांगे पांच लाख रुपए
शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में लिखा है- 'दस्तावेज परीक्षण के बाद जब मैं विभाग के अफसरों के कक्ष से बाहर निकला तो उपसंचालक ओ.पी. शर्मा और सहायक संचालक ने मुझे पकड़ लिया और कहा कि अगर पांच लाख रुपए की व्यवस्था हो जाएगी, तो मेरा चयन उपसंचालक पद के लिए कर दिया जाएगा।' दोनों अफसरों का कहना था कि विभाग के सचिव प्रसन्ना आर. को डेढ़ लाख देना होगा। संचालक धर्मेश साहू भी डेढ़ लाख लेंगे और हम दोनों एक-एक लाख देना होगा। शिकायतकर्ता ने कहा कि जब मैंने भारी-भरकम रुपयों के प्रबंध में असमर्थता व्यक्त कर दी, तो मेरा चयन नहीं किया गया। बाद में मैंने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी, तो केवल एक बार रजिस्टर अवलोकन के लिए बुलाया गया। जब मैं विभाग पहुंचा, तो मेरे 81 नंबर 52 हो गए थे और उस पर मेरे हस्ताक्षर भी नहीं थे।
पैसे मांगने वाला बना जनसूचना अधिकारी
संजय पाठक का कहना है कि वे मामले की तह में जाने के लिए सूचना के अधिकार के तहत जानकारियां मांग रहे हैं, लेकिन विभाग ने भारी-भरकम रकम की मांग करने वाले राजेंद्र कुमार डेकाटे को ही जनसूचना अधिकारी बना दिया है। अब सूचना भी नहीं दी जा रही है। 'पत्रिका' ने इस मामले में सम्बंधितों का पक्ष जानना चाहा, लेकिन पहले भी विवादों में घिरे रहे उपसंचालक ओ.पी. शर्मा को छोड़कर सभी ने कहा कि शिकायत निराधार है, इसलिए जांच की आवश्यकता
नहीं है।
खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संचालक धर्मेश साहू ने कहा कि देखिए भर्तियों के लिए जो पद निकले थे, वो सीधी भर्ती के नहीं थे। भर्ती के लिए जो भी प्रक्रिया अपनाई गई है, वह पूरी तरह से पारदर्शी है। मुझे शिकायतकर्ता की बात में दम नजर नहीं आया, इसलिए जांच नहीं करवाई।
खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहायक संचालक राजेंद्र डेकाटे ने कहा कि शिकायतकर्ता ने कई जगहों पर हमारी शिकायत की है, लेकिन हम पाक-साफ हैं। हमने किसी से कोई पैसा नहीं मांगा। हम ईमानदारी से काम करते हैं, इसलिए कई सालों से विभाग में जमे हुए हैं।
खेल विभाग तात्कालिक विशेष सचिव प्रसन्ना आर. ने कहा कि हां, एक अभ्यर्थी संजय कुमार पाठक ने शिकायत की थी। भला कोई हमारे नाम से पैसा क्यों मांगेगा, इसलिए हमने जांच की जरूरत नहीं समझी।