रायपुर

ड्रेस से तय हो रही Free पार्किंग! रायपुर मरीन ड्राइव पर लोअर-टीशर्ट फ्री, जींस-शर्ट वालों से वसूली…

Raipur Marine Drive: रायपुर के मरीन ड्राइव पर नगर निगम की नई पार्किंग व्यवस्था अब विवादों में घिर गई है। दावा किया गया था कि सुबह-शाम टहलने आने वाले लोगों से पार्किंग शुल्क नहीं लिया जाएगा

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Feb 18, 2026
ड्रेस से तय हो रही पार्किंग Free! रायपुर मरीन ड्राइव पर ‘लोअर-टीशर्ट फ्री’, जींस-शर्ट वालों से वसूली...(photo-AI)

Raipur Marine Drive: छत्तीसगढ़ के रायपुर के मरीन ड्राइव पर नगर निगम की नई पार्किंग व्यवस्था अब विवादों में घिर गई है। दावा किया गया था कि सुबह-शाम टहलने आने वाले लोगों से पार्किंग शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। यहां ‘पहनावे’ के आधार पर यह तय किया जा रहा है कि कौन टहलने आया है और किससे शुल्क लिया जाएगा।

Raipur Marine Drive: पहनावे से तय हो रहा ‘टहलने वाला’

मौके पर तैनात कर्मचारियों के अनुसार, जो लोग लोअर और टी-शर्ट पहनकर आते हैं, उन्हें मॉर्निंग/ईवनिंग वॉकर मानकर पार्किंग शुल्क से छूट दी जा रही है। वहीं जींस, फॉर्मल शर्ट या अन्य सामान्य कपड़ों में आने वालों को ‘मनोरंजन’ श्रेणी में रखकर उनसे शुल्क वसूला जा रहा है। कर्मचारियों का दावा है कि वे “हुलिया देखकर पहचान लेते हैं” कि कौन टहलने आया है और कौन घूमने। हालांकि इस मानक को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

‘हुलिया आधारित’ वसूली पर उठे सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह पूरी व्यवस्था कर्मचारियों के विवेक पर आधारित है। कई बार बहस की स्थिति बनती है और कुछ मामलों में कर्मचारी बिना शुल्क लिए पीछे हट जाते हैं, जबकि शांत रहने वालों से पर्ची काट दी जाती है। इससे नियमों की पारदर्शिता और समानता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सड़क किनारे लग रही गाड़ियां

विवाद के बाद कई लोगों ने अधिकृत पार्किंग का उपयोग कम कर दिया है। वाहन चालक अब आसपास की गलियों और सड़कों पर गाड़ियां खड़ी कर मरीन ड्राइव पहुंच रहे हैं। सोमवार को कुछ लोग शुल्क मांगे जाने पर वाहन खड़ा किए बिना ही लौट गए।

वसूली का समय और आय

  • वसूली का समय: दोपहर 12 बजे से रात 11 बजे तक
  • तैनात कर्मचारी: शिफ्ट के अनुसार पांच
  • अनुमानित दैनिक आय: 3,000 से 5,000 रुपये
  • छूट का आधार: लोअर-टीशर्ट (कर्मचारियों के विवेक पर)

व्यवस्था में खामियां

एक बड़ी खामी यह भी सामने आई है कि पार्किंग पर्ची उन्हीं वाहनों की काटी जा रही है जो कर्मचारियों की नजर में आ जाते हैं। जो वाहन चालक गाड़ी खड़ी कर तुरंत परिसर में प्रवेश कर जाते हैं, वे कई बार शुल्क से बच जाते हैं। इससे व्यवस्था ‘चोर-सिपाही’ के खेल जैसी प्रतीत हो रही है।

निगम का पक्ष

राजस्व विभाग के अध्यक्ष अवतार भारती बागल ने बताया कि पार्किंग व्यवस्था से प्रतिदिन तीन से पांच हजार रुपये तक का राजस्व प्राप्त हो रहा है। एक माह तक व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी, जिसके बाद टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से आगे की रणनीति तय की जा सकती है। जनसुविधा के नाम पर लागू की गई इस व्यवस्था में ‘ड्रेस कोड’ के आधार पर शुल्क वसूली ने अब नए विवाद को जन्म दे दिया है। शहर में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

Updated on:
18 Feb 2026 12:09 pm
Published on:
18 Feb 2026 12:07 pm
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