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प्रदेश में 65 हजार शिक्षक पद खाली, फिर भी संतुलित अनुपात का दावा… आखिर सच क्या है? जानिए पूरी हकीकत

Teacher Vacancy: छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में दोहरी तस्वीर दिखाई देती है। एक ओर राज्य के स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात कागजों में संतोषजनक नजर आता है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों के हजारों स्वीकृत पद रिक्त होना गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।

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शिक्षक (फाइल फोटो-पत्रिका)

CG Teacher Vacancy: छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में दोहरी तस्वीर दिखाई देती है। एक ओर राज्य के स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात कागजों में संतोषजनक नजर आता है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों के हजारों स्वीकृत पद रिक्त होना गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। राज्य में लगभग 65 हजार से ज्यादा शिक्षकों (प्राचार्य व अलग-अलग विभाग में कार्यरत को छोडक़र) के पद खाली हैं।

स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट के अनुसार, राज्य के स्कूलों में प्रति शिक्षक लगभग 28 छात्र-छात्राएं है। यूडाइस की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के प्राइमरी स्कूलों में 18 छात्रों पर एक शिक्षक, अपर प्राइमरी में 15, सेकेंडरी में 14 और हायर सेकेंडरी स्तर पर 12 छात्रों पर एक शिक्षक की व्यवस्था दर्ज की गई है। संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में यह डाटा दिया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ के आधिकारिक वेबसाइट के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 1,78,731 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि छात्र-छात्राओं की संख्या 51,67,357 तक पहुंच चुकी है।

शिक्षकों की कमी का असर विषयवार पढ़ाई पर

स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से हाल ही में जारी नोटिफिकेशन में यह स्पष्ट किया गया है कि छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के कुल स्वीकृत पद 2,44,054 हैं। इन आंकड़ों में प्राचार्य व डाइट, एससीईआरटी जैसे विभागों में कार्यरत शिक्षकों के आंकड़े नहीं लिए गए है। इसके अनुसार, राज्य में अब भी करीब 65 हजार से अधिक पद खाली पड़े हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन रिक्तियों का सीधा असर ग्रामीण इलाकों, एकल शिक्षक स्कूलों और पढ़ाई पर पड़ रहा है।

शिक्षा की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्वीकृत पदों पर समयबद्ध नियुक्तियां की जाती हैं, तो न सिर्फ शिक्षक-छात्र अनुपात और बेहतर होगा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो आने वाले वर्षों में शिक्षक-छात्र अनुपात तो संतुलित दिखेगा, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ना तय है।

परीक्षाएं तो शुरू पर पढ़ाई ठप

राज्य के स्कूलों में परीक्षा का दौर तो शुरू हो गया है लेकिन लगभग चार माह से स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था ठप है। एक ओर स्कूलों में शिक्षक नहीं है दूसरी ओर शिक्षकों को एसआईआर और अन्य कार्यों में लगा दिया गया है। जिसके कारण राजधानी के साथ ही दूसरे जिलों के कई स्कूल ऐसे है जो एक या दो शिक्षकों के ही भरोसे ही चलाया जा रहा है।

शिक्षक-छात्र अनुपात

  • प्राइमरी स्कूल: 18 छात्रों पर 1 शिक्षक
  • अपर प्राइमरी: 15 छात्रों पर 1 शिक्षक
  • सेकेंडरी: 14 छात्रों पर 1 शिक्षक
  • हायर सेकेंडरी: 12 छात्रों पर 1 शिक्षक