
Chhattisgarh News: अजय रघुवंशी. प्रोफेसर कॉलोनी सहित वामनराव लाखे वार्ड की लगभग एक लाख की आबादी को इस मानसून में भी जलभराव से राहत मिलने की उम्मीद टूटती नजर आ रही है। वजह भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने रिंग रोड के बीचों-बीच नालियों के पानी को उस पार भेजने के प्रोजेक्ट में तीन शर्त रख दी है। पत्रिका ने अपनी पड़ताल में पाया कि 15 दिन पहले ही एनएचएआई ने नया अपटेड दिया है।
इसी शर्त पर अब पूरा प्रोजेक्ट अटका हुआ है। प्रोफेसर कॉलोनी सहित 30 से अधिक मोहल्लों के लिए यह बारिश फिर चुनौतीपूर्ण साबित होने वाली है, क्योंकि पानी निकलने का रास्ता ही नहीं है। रिंग रोड की नालियों से पानी उस पार चिंगरी नाला तक नहीं पहुंच पाता। इसे कनेक्ट करने के लिए रिंग रोड की बीचों-बीच खोदाई करके पानी को चिंगरी नाले से जोड़ना होगा।
सूत्रों के मुताबिक रिंग रोड निर्माण के समय ही बीचों-बीच नालियों के पानी को बड़े नाले से कनेक्ट किया जाना था। तब यह समस्या उसी समय लगभग 60-70 से प्रतिशत कम हो जाती। (Raipur News) रिंग रोड के इस पार जमा होने वाले पानी को नाले के उस पार स्थित चिंगरी नाले से जोड़कर स्थायी निकासी व्यवस्था तैयार करना चाहिए था, जो काम 15 साल पहले कर लिया जाना था। इस पर अभी योजना बनाई जा रही है।
मेयर मीनल चौबे ने कहा कि रिंग रोड- नं.1, प्रोफेसर कॉलोनी जलभराव मामले में हमने एनएचएआई को प्रजेंटेशन सौंपा है। एनएचएआई ने तीन अलग-अलग बिंदुओं पर शर्त रखी है। इस संबंध में हमने पुन: डिटेल रिपोर्ट एनएचएआई को भेजा है। वर्तमान में जवाब का इंतजार है।
एनएचएआई, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, दिग्विजय सिंह ने कहा कि रिंग रोड से नाला कनेक्ट करने के लिए नगर-निगम से प्रस्ताव मिला है। इस संबंध में निगम के जवाब का अध्ययन करते हुए इस पर पुन: चर्चा करेंगे।
विधायक सुनील सोनी ने कहा कि प्रोफेसर कॉलोनी सहित आस-पास के अन्य क्षेत्रों में जलभराव खत्म करने व रिंग रोड से उस पार नाला कनेक्ट करने के लिए राशि स्वीकृत हो चुकी है। मैं नगर-निगम और एनएचएआई में एक बार फिर बात करता हूं, ताकि समस्या का शीघ्र निराकरण हो सके।