
हिमांशु शर्मा की रिपोर्ट. रायपुर से बिलासपुर को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे-130 अब सुगम सफर का माध्यम नहीं, बल्कि 'मौत का द्वार' बनता जा रहा है। 'पत्रिका' ने अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग में पाया कि 1500 करोड़ से अधिक की लागत से बनी इस 6-लेन सड़क की हालत किसी बदहाल ग्रामीण सड़क से भी बदतर हो चुकी है। सड़क पर जगह-जगह इतने गहरे गड्ढे हैं कि तेज रफ्तार में वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा हर पल बना रहता है।
पत्रिका टीम ने रायपुर-सिमगा और सिमगा-बिलासपुर के बीच करीब 90 किलोमीटर का सफर तय किया। ( Chhattisgarh News ) इस दौरान हाईवे की चमचमाती दावों के पीछे छिपी बदहाली, भ्रष्टाचार और लापरवाही की परतें खुल गईं। पूरे रास्ते में 500 से अधिक बड़े और जानलेवा गड्ढे मिले। स्थिति यह है कि कहीं सड़क आधा फीट तक धंस गई है, तो कहीं गड्ढों की गहराई एक फीट तक पहुंच चुकी है। सबसे बड़ा खतरा यह है कि ये गड्ढे अचानक चालकों के सामने आ जाते हैं।
इनसे बचने के चक्कर में वाहन चालक अचानक लेन बदलते हैं, जो हादसों और सीधी टक्कर की मुख्य वजह बन रहा है। रायपुर-सिलतरा और रायपुर-धरसींवा फ्लाईओवर पर हालात और भी डरावने हैं। रात के वक्त परेशानी दोगुनी हो जाती है, क्योंकि कई हिस्सों में स्ट्रीट लाइटें पूरी तरह बंद रहती हैं। अंधेरे में गड्ढे दिखाई नहीं देते और वाहन सीधे उनमें समा जाते हैं।
घटिया पेंचवर्क: महज दो महीने पहले किया गया पेंचवर्क उखड़ चुका है और घटिया सामग्री के इस्तेमाल की पोल खुल गई है। फ्लाईओवर के लोहे के छड़ तक बाहर दिखने लगे हैं।
उबड़-खाबड़ डामर: कहीं डामर पूरी तरह उखड़ गया है, तो कहीं पेंचवर्क के बाद सड़क समतल होने के बजाय बेहद उबड़-खाबड़ हो गई है।
90% स्ट्रीट लाइट बंद: हाईवे की लगभग 90 फीसदी स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। रोशनी न होने से चालकों को दूर से गड्ढे दिखाई ही नहीं देते।
सबसे ज्यादा खतरे वाले क्षेत्र: सिलतरा, धरसींवा, तरपोंगी, सिमगा और सड्डू जैसे इलाकों में सड़क की स्थिति सबसे ज्यादा जानलेवा है।
नेशनल हाईवे जैसे महत्वपूर्ण मार्ग की यह दुर्दशा सीधे तौर पर सड़क सुरक्षा और निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। रोजाना 45 से 50 हजार वाहन चालकों को उम्मीद रहती है कि हाईवे उन्हें सुरक्षित सफर देगा, लेकिन मौजूदा स्थिति में सड़क खुद ही एक बड़े खतरे में तब्दील हो चुकी है।
रायपुर से बिलासपुर को जोड़ने वाली यह एकमात्र 6-लेन सड़क अब पूरी तरह डेंजर जोन बन गई है। गड्ढों के कारण अमूमन दो घंटे में पूरा होने वाला यह सफर अब 3 घंटे से भी अधिक समय ले रहा है। औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण इस मार्ग पर भारी कमर्शियल वाहनों के साथ-साथ बड़ी संख्या में यात्री बसें, कारें और दोपहिया वाहन गुजरते हैं, जिससे हर वक्त किसी बड़ी अनहोनी की आशंका बनी रहती है।
कुल लागत: 1500 करोड़ रुपए से अधिक
लेन: 6 लेन
निर्माण कार्य पूरा: वर्ष 2018
संबंधित विभाग: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई)
रोजाना गुजरने वाले वाहन: 45000 से 50000
ये अधिकारी हैं जिम्मेदार
क्षेत्रीय अधिकारी: आलोक कुमार
प्रोजेक्ट डायरेक्टर (रायपुर पीआईयू): दिग्विजय सिंह
प्रोजेक्ट डायरेक्टर (बिलासपुर पीआईयू): मुकेश कुमार परगनिहा
प्रोजेक्ट डायरेक्टर (बिलासपुर पीआईयू), एनएचएआई क्षेत्रीय कार्यालय मुकेश कुमार परगनिहा ने कहा कि नयह हिस्सा रायपुर पीआईयू के अंतर्गत आता है। सिमगा से बिलासपुर के बीच खराब सड़कों की मरम्मत का काम किया जा रहा है। इस संबंध में संबंधित कंस्ट्रक्शन कंपनी को जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।