यहां की महिलाओं को भी अपनी कोख पर गर्व है कि उन्होंने ऐसे लाल पैदा किए हैं, जो अपने तन में वर्दी सजाकर देश की सेवा कर रहे हैं
अब्दुल रज्जाक@धमतरी. महानदी के तट पर बसा गांव सारंगपुरी। करीब 22 सौ की आबादी वाले इस गांव के युवाओं में देशभक्ति का जज्बा देखते ही बनता है। यहां मेरा रंग दे बसंती चोला का तराना बूढ़े से लेकर युवाओं के जुबां पर हैं।
यहां की महिलाओं को भी अपनी कोख पर गर्व है कि उन्होंने ऐसे लाल पैदा किए हैं, जो अपने तन में वर्दी सजाकर देश की सेवा कर रहे हैं। भावी पीढ़ी भी अब उस अवसर की तलाश में है, जब आर्मी में उनका चयन होगा और वे भी देश सेवा के इस यज्ञ में शामिल होंगे। आर्मी में भर्ती जवानों का कहना है कि हमारे जीवन की सार्थकता तभी है, जब हम इस मिट्टी का कर्ज चुका दें।
जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर सारंगपुरी में ऊबड़-खाबड़ रास्ते से होते हुए जब हम यहां पहुंचे तो कुछ युवा अपने हाथों में तिरंगा झंडा लेकर भारत माता की जयघोष करते हुए रैली निकाल रहे थे। वे घर-घर जाकर लोगों से जश्ने आजादी के समारोह में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे थे। इस गांव में जश्ने आजादी के एक दिन पहले ही सर्वत्र खुशी छाई हुई थी। इसमें महिलाएं और युवतियां भी शामिल थीं। युवा मनोहर नेताम, लेखराम साहू ने बताया कि हर साल हम यह राष्ट्रीय पर्व धूमधाम से मनाते हैं। युवती संगीता, रामेश्वरी ने बताया कि इस दिन का हमें बेसब्री से इंतजार रहता है। 15 अगस्त को सुबह से ही हर घर में तिरंगा लहराने लगता है। यहां की माटी में ही देश प्रेम की महक है। उल्लेखनीय है कि ग्राम सारंगपुरी और इससे लगे ग्राम खरेंगा के करीब ५० से ज्यादा जवान आर्मी में अपनी सेवा दे रहे हैं। ग्रामीण श्यामलाल साहू, मनोहर सोनकर, दिनेश निषाद ने बताया कि जब कोई बच्चा जवानी की दहलीज पर कदम रखता है, तो सबसे पहले वह अपने तन में वर्दी सजाने का सपना देखता है।
इस गांव के युवाओं में देशभक्ति का रंग और उनके परिजनों द्वारा उनका हौसला बढ़ाने पर यह गांव इलाके में मिसाल बन गया है।
ग्राम सारंगपुरी के चोवाराम यादव ने 1978 में आर्मी में भर्ती होने के इरादे को लेकर आवेदन किया था। जब उसे कॉल लेटर मिला तो वह खुशी से झूम उठा। कठिन परिश्रम करने के बाद भी वह फिटनेस चेकअप मेंं फेल हो गया, जिसके चलते उसका सपना पूरा नहीं हो सका। उसने संकल्प लिया कि अब वह अपने गांव के युवाओं को आर्मी के लिए तैयार करेगा। फिर क्या था, उनसे ट्रेनिंग लेने के बाद एक के बाद एक युवा आर्मी में सिलेक्ट होने लगे।
रिटायर्ड सैनिक केपी साहू 16 साल तक आर्मी में सेवा देने के बाद आज भी देश की सेवा के लिए समर्पित युवाओं की पौध तैयार कर रहा है। उसने बताया कि सारंगपुरी के अलावा आसपास के कई गांव के युवाओं को वह आर्मी में भर्ती होने के लिए टे्रनिंग दे रहा है। आज इस क्षेत्र से हर साल कम से कम पांच युवाओं का चयन आर्मी में होता है। उनका आगे कहना है कि- जिंदगी की अंतिम सांस तक वह जवानों में जज्बा-ए-वतन की भावना पैदा करता रहेगा।
देश के लिए मर मिटने का जज्बा पैदा करने वाले ग्राम सारंगपुरी का सबसे बड़ा दर्द यह है कि इस गांव में आजादी के 71 साल के बाद भी विकास की किरण नहीं पहुंची है। यहां के लोग पानी, बिजली, सडक़, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। गांव में सिर्फ मीडिल स्कूल है। आगे की पढ़ाई करने के लिए दूसरे गांव जाना पड़ता है। सडक़ की स्थिति इतनी जर्जर है कि इस पर चलने पर हर पल खतरा मंडराते रहता है। और तो और युवाओं के लिए अदद एक मैदान भी नहीं है। वे महानदी की सूर्ख रेत पर पसीना बहाकर अपने सपने को पूरा करते हैं।
जवान दानीराम के पिता खूबचंद विश्वकर्मा अपने दो बेटे को आर्मी में सेवा देते हुए देखकर खुशी से फूला नहीं समाते। वे जब भी मौका मिलता है, अपने बेटों की पुरानी वर्दी को पहनकर गांव में घूमता है। उनका कहना है कि बड़े खुशनसीब होते हैं वे माता-पिता जिनके बच्चों को देश की सीमा की पहरेदारी करने का अवसर मिलता है।
यहां के जितने भी जवान आर्मी में हैं, वे सब दीपावली के समय छुट्टी लेकर अपने घर आते हैं। एक साथ जब इकट्ठा होते है, तो आपस में अपने अनुभव को शेयर करते हैं। इसके अलावा युवाओं को भी मोटिवेट करते हैं। गांव में आपसी प्रेम और सद्भावना की नींव इतनी मजबूत हैं कि सभी जवान एक-दूसरे के घर में जाकर भोजन करते हैं। बुजुर्ग महिला रामबती सोनकर का कहना है कि मेरा कोई बेटा नहीं है, लेकिन इस गांव का हर बेटा मेरा अपना है। दीवाली के दिन मेरे ये बेटे जब मुझे गिफ्ट देते हैं, तो आंखे खुशी से भर जाती है। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करती हूं कि मेरे इन बेटों पर कभी किसी दुश्मन की नजर न लगे।
छुट्टी में घर आए जवान दानीराम विश्वकर्मा (28) ने बताया कि बचपन से ही वह आर्मी में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहता था। पिता और भाई ने प्रोत्साहित किया। मां का भी आशीर्वाद मिला और एक दिन सपना पूरा हो गया। उसका कहना है कि बड़े खुशनसीब होते हंै वे लोग जिन्हें अपने देश की सेवा करने का मौका मिलता है। इस राह में यदि मेरी जान भी चली जाए, तो मेरे लिए गर्व की बात होगी।
वर्तमान में स्व. चोवाराम यादव के सपने को युवा विमल कुमार सेन आगे बढ़ा रहा है। वह सुबह ठीक ४ बजे उठकर युवाओं को टे्रनिंग देता है। इतना ही नहीं आर्मी मेंं भर्ती के लिए आवेदन भरने समेत अन्य औपचारिकताओं को भी पूरी करता है। उसने बताया कि मैं भी आर्मी में भर्ती होना चाहता था। प्रारंभिक टेस्ट में पास होने के बाद आगे हाईट कम होने के कारण सपना पूरा नहीं हुआ। आज खुशी है कि मेरे कई साथी आर्मी में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे हैं।
सबसे अधिक जवानों के आर्मी में होने के कारण ही आज ग्राम सारंगपुरी धमतरी जिले का आदर्श ग्राम बना हुआ है। हम सभी को उन पर गर्व है। विकास कार्यों के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है, जल्द ही मंजूरी मिल जाएगी। - अनसुईया बाई, सरपंच
आर्मी में भर्ती होकर देश की सेवा करने वालों में दिलीप साहू, डेमनलाल, सुरेश चक्रधारी, नीलकमल चक्रधारी, कामता चक्रधारी, रविन्द्र चक्रधारी, पुरूषोत्तम विश्वकर्मा, दानीराम विश्वकर्मा, भागवत साहू, प्रदीप चक्रधारी, कोमल साहू, हरिश साहू, कोमल सोनकर, भोजराम सोनकर, वेदराम दीवान, धनराज दीवान, चुम्मन कंवर, चकेश्वर कंवर, चेतन नेताम, खूबलाल नेताम, ठाकुरराम नेताम, दीपक कुमार नेताम, खोमनलाल नेताम, नारायणलाल, संजय यादव, प्रदीप कुमार ध्रुव, हिरेन्द्र नेताम, भानुप्रताप साहू, हेमंत यादव, चोवाराम सेन आदि शामिल हैं।
सबसे पहले ग्राम सारंगपुरी में कोमल सोनकर और ग्राम खरेंगा में दिलीप साहू की आर्मी में भर्ती हुई। वे जब भी छुट्टी में घर आते और सैनिकों के शौर्य का बखान करते, तो युवा रोमांचित हो जाते। उनसे प्रेरणा लेकर ही यहां के करीब ५० युवाओं ने अपने तन में वर्दी सजा ली।