
रायपुर . छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने की सूचना से शिक्षाकर्मियों में उम्मीद की एक नई किरण जागी है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लगातार शिक्षाकर्मियों की मांगों की अनदेखी की जा रही है। ऐसे में शिक्षाकर्मियों ने तय किया है कि वे लोग प्रधानमंत्री के छतीसगढ़ दौरे में उनसे मिलने का समय मागेंगे और उन्हें अपनी समस्या बताऐंगे। उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री द्वारा उनकी समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा।
प्रधानमंत्री से मिलकर उन्हें सौपेंगे दस्तावेज
14 अप्रैल को प्रधानमंत्री बस्तर प्रवास पर छत्तीसगढ़ आने वाले है। इसलिए शालेय शिक्षाकर्मी संघ ने तय किया है कि वो लोग मिलकर नरेंद्र मोदी से मिलने का समय मागेंगे। यदि शिक्षाकर्मियों को प्रधानमंत्री से मुलाकात का समय मिलता है, तो वे प्रधानमंत्री को अपनी मांगों के संबंध में तैयार पूरे दस्तावेज की कापी सौंपेंगे। शिक्षाकर्मियों ने हाल ही में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति को भी करीब 200 पेजों का पूरा दस्तावेज सौंपा है।शिक्षाकर्मियों को प्रधानमंत्री से मदद को लेकर काफी उम्मीदें है।
गौरतलब है कि राज्य में शिक्षाकर्मी पिछले काफी समय से संविलियन सहित अपनी 9 सूत्रीय मांगों के लिए आंदोलन कर रहे है। लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार हर बार उनकी मांगों को टालते आ रही है। कभी हाईपावर कमेटी का गठन करके तो कभी उस कमेटी के अंतर्गत टीम बनाकर राजस्थान भेज कर । इसलिए शिक्षाकर्मियों में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
शिक्षाकर्मियों ने किया मूल्यांकन का बहिष्कार
अपनी मांगों की लगातार हो रही अनदेखी से आक्रोशित शिक्षकों ने छत्तीसगढ़ बोर्ड की परीक्षाओं के मूल्यांकन का बहिष्कार कर दिया था। बाद में फिर सभी ने मिलकर काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध के साथ मूल्यांकन का काम शुरू किया।
शालेय शिक्षाकर्मी संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र दुबे ने बताया कि प्रधानमंत्री 14 अप्रैल को बस्तर के दौर पर आ रहे हैं। हम शासन से मुलाकात कर प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगेंगे।