Raipur News: अभियान के दौरान पुलिस ने 174 संदिग्धों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की। इसी तरह 31 फरार वारंटियों को गिरफ्तार किया गया। 14 स्थायी सहित 46 वारंटों को तामिल किया गया।
CG News: @अनुराग सिंह। यह विडंबना है कि प्रदेश की राजधानी रायपुर में पढ़ाने वाले शिक्षकों को आज भी अपने विभागीय कामों के लिए 30 किलोमीटर दूर भटकना पड़ रहा है। शहर के सैकड़ों शिक्षक हर छोटे-बड़े प्रशासनिक कार्य के लिए धरसींवा स्थित विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं और यह स्थिति एक-दो साल नहीं, बल्कि लंबे समय से बनी हुई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राजधानी में आज तक शहरी क्षेत्र के लिए अलग से विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय की व्यवस्था ही नहीं की गई।
विभागीय उदासीनता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शहर में मौजूद एकमात्र कार्यालय भी केवल डेटा कलेक्शन सेंटर बनकर रह गया है। जिले में कुल 85 संकुल हैं, जिनमें से 50 संकुल शहरी क्षेत्र के स्कूलों को नियंत्रित करते हैं। इन सभी स्कूलों के शिक्षकों को हर काम के लिए धरसींवा जाना पड़ता है। यानी राजधानी के शिक्षकों के लिए यह असुविधा है।
राज्य शिक्षक संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और छत्तीसगढ़ शिक्षक महासंघ के नरेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि रायपुर जिले में शिक्षा विभाग के दो कार्यालय होने के चलते शिक्षकों को अधिकारियों से मिलने-संवाद करने में परेशानी होती है। अधिकतर शिकायत, विभागीय जानकारी डाक के आदान-प्रदान के लिए शिक्षकों को भटकना पड़ता है।
इसलिए शिक्षकों की मांग है कि रायपुर शहर के विस्तार और स्कूलों की संख्या अधिक होने के चलते यहां पर पृथक खंड शिक्षा अधिकारी की पदस्थापना होनी चाहिए। इससे 50 संकुल के शिक्षकों राहत मिलेगी, जिन्हें फिलहाल धरसींवा जाना पड़ता है।
राजनैतिक दृष्टि से भी रायपुर चार भागों में बंटा हुआ है रायपुर उत्तर, रायपुर पश्चिम, रायपुर दक्षिण और रायपुर ग्रामीण है, लेकिन शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली के अनुसार यहां के विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय का संचालन धरसीवां से होता है।
रायपुर और आसपास के स्कूलों को जोड़कर शहरी खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के संचालित होने से विभाग पर दबाव कम होगा। वैसे भी अभी शहर के लिए शहरी विकास खंड समन्वयक समग्र शिक्षा के पद की स्वीकृति मिली हुई है और यहां यूआरसीसी का अस्थाई तौर पर कार्यरत हैं। कुल मिलाकर, रायपुर जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते शहर में शिक्षा प्रशासन का विकेंद्रीकरण अब जरूरी हो गया है। शहरी बीईओ कार्यालय की स्थापना से न केवल शिक्षकों की परेशानी दूर होगी, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की कार्यक्षमता भी बेहतर होगी।