
सुमीत यादव@रायपुर . मलेशिया में एनिमल से निकलने वाले संक्रमण वायरस की वजह से वहां के किसानों को मस्तिष्क बुखार जैसी बीमारी का प्रकोप बहुत तेजी के साथ हुआ, जिससे 'निपाह वायरस' का पता चला। साथ ही केरल के कोझीकोड में इस तरह के संक्रमण वायरस के प्रकोप से 10 लोगों की मौत हो चुकी है।
लगातार सोशल साइट्स पर इस वायरस संबंधी कई अपडेट वायरल हो रहे हैं।
केरल से राजधानी के जुड़ाव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रदेश के सभी जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। गुरुवार देर शाम राज्य महामारी नियंत्रक की ओर से जारी आदेश में इसके संक्रमण के कारण, लक्षण और बचाव संंबंधी निर्देश जारी किए गए हैं।
जारी निर्देश में अचानक किसी परिवार या समुदाय में बुखार के साथ मानसिक बदलाव अथवा झटके की स्थिति में जिले या राज्य के सर्वेलेंस अधिकारी को सूचित करने के साथ उनके गले, ब्लड, यूरिन अथवा सीएसएफ सैंपल राष्ट्रीय वायरोलॉजी संस्थान, पुणे भेजने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं किसी व्यक्ति में लक्षण दिखने पर 21 दिनों तक सर्वेलेंस पर रखने कहा है।
चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. आनंद भट्टर बताते है कि निपाह जैसे कई वायरस होते है जो बहुत ही खतरनाक होते है। यह बड़ों के लिए है, उतना ही बच्चों के लिए खतरनाक है। बच्चों को बाहर के आइटम्स खाने पर रोक लगाएं। जैसे मार्केट में मिल रहे फल, जंकफूड्स के कई वैराटी आदि।
ध्यान रखें और खाना खाने से पहले विशेष रूप हैंडवॉश करके ही भोजन करें।
[typography_font:14pt] मार्केट से आ रहे केरल के फल जैसे केला आदि को लेने से पहले ठीक ढंग से चेक करके खरीदारी करें।
[typography_font:14pt] बाहर के आइट्म्स का उपयोग न करके घर के बने भोजन का उपभोग करें।
[typography_font:14pt] इस तरह संक्रमण बीमारी से ग्रसित लोगों से बचने का प्रयास करे और अगर आप कहीं बाहर घूमने जा रहे हैं तो मास्क का उपयोग निश्चित रूप से ही करें।
[typography_font:14pt;" > शुरुआती लक्षण के नजर आने से तुरंत उपचार के लिए अस्पताल व डॉक्टर से संपर्क करें।
उन लोगों के संपर्क में आने कि वजह से जो पहले ही निपा वायरस के संक्रमण में है।