रायपुर

प्राचार्य उठा रहा सचिव के सरकारी वाहन का सुख, शिक्षा विभाग ने थमाया नोटिस

दो माह पूर्व साइंस कॉलेज में कार्यभार संभालने के बावजूद नहीं लौटाया वाहन

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May 28, 2018
chhattisgarh education board
शासन द्वारा उच्चाधिकारियों को दी जाने वाली सुविधाओं का दुरुपयोग किस तरह से किया जाता है, इसका सीधा उदाहरण साइंस कॉलेज के प्राचार्य के रसूख से देखा जा सकता है।

रायपुर . शासन द्वारा उच्चाधिकारियों को दी जाने वाली सुविधाओं का दुरुपयोग किस तरह से किया जाता है, इसका सीधा उदाहरण साइंस कॉलेज के प्राचार्य के रसूख से देखा जा सकता है। वे सचिव उच्च शिक्षा को आवंटित सरकारी वाहन स्विफ्ट डिजायर से आना-जाना कर रहे हैं और अधिकारी को वैकल्पिक व्यवस्था से काम चलाना पड़ रहा है।

साइंस कॉलेज के डॉ. डीएन वर्मा प्राचार्य व क्षेत्रीय कार्यालय के प्रभारी अपर संचालक के पद पर पदस्थ हैं और वे शासन की ओर से उच्च शिक्षा सचिव को आबंटित वाहन का धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं। यह गाड़ी उन्हें कुछ दिनों पूर्व उच्च शिक्षा संचालनालय में ओएसडी पद पर रहने के दौरान दी गई थी।

दो माह पहले ही उनकी नई पदस्थापना साइंस कॉलेज के प्राचार्य के रूप में की गई। पदभार ग्रहण करने के बावजूद शासन को गाड़ी वापस नहीं की। मामले में संयुक्त संचालक उच्च शिक्षा ने पत्र भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि इस पर डॉ. वर्मा का कहना है कि उन्होंने गाड़ी वापस कर दी है, जबकि पत्रिका टीम ने भ्रमण के दौरान दो दिनों पूर्व ही यह गाड़ी साइंस कॉलेज में देखी थी।

उच्च शिक्षा संचालनालय के पत्र से हुआ खुलासा इस पूरे मामले का खुलासा 21 मई 2018 को कार्यालय उच्च शिक्षा संचालनालय द्वारा क्षेत्रीय प्रभारी अपर संचालक को लिखे गए पत्र से हुआ, जिसकी प्रति पत्रिका के पास मौजूद है। इसमें साफ तौर पर उल्लेखित किया गया है, कि वाहन क्रमांक- सीजी-02-6763, डिजायर को उच्च शिक्षा सचिव को आबंटित की गई है। जबकि इस वाहन सहित प्रदत्त चालक का उपभोग अब भी उनके माध्यम से किया जा रहा है, छग सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का सीधा उल्लंघन है।

संयुक्त संचालक की ओर से जारी पत्र में डॉ. वर्मा से पत्र जारी होने के सप्ताह भर के अंदर वाहन की वापसी सहित सिविल सेवा नियम के उल्लंघन पर स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही उनकी ओर से यह भी पूछा गया है कि क्यों न उच्च शिक्षा सचिव को गाड़ी को आबंटित करने के बाद से अब तक मार्केट रेट के अनुरूप उनसे गाड़ी के किराए सहित ड्राइवर का वेतनमान भी वसूला जाए।

उच्च शिक्षा सचिव को आबंटित गाड़ी की रोजाना रनिंग नया रायपुर व रायपुर के मध्य ही 100 किमी रोजाना का होता है। साथ ही निजी ट्रांसपोर्ट कंपनियों के मुताबिक इसका मासिक चार्ज लगभग 50 हजार रुपये का होता है। जिसमें डीजल सहित ड्रायवर का भुगतान जुड़ा हुआ है। एेसे में उनकी ओर से लगभग दो माह से अधिक की अवधि से इसका अवैध रूप से उपयोग किया जा रहा है। जिसके किराए के रूप में उनसे लगभग 1 लाख रुपये की वसूली की जा सकती है।

उत्तर - यह विभागीय मामला है, मैं बताना जरूरी नहीं समझता।

Published on:
28 May 2018 09:00 am