- स्वास्थ्य मंत्री के आदेश पर दो महीने से चल रही 108 की संचालन कंपनी की जांच, कार्रवाई के संकेत - बिहार स्वास्थ्य विभाग की छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग को चिट्ठी से हो रहा खुलासा
रायपुर.प्रदेश की लाइफ-लाइन कही जाने वाली संजीवनी 108 के संचालन के लिए अनुबंधित कंपनी जय अम्बे इमरजेंसी सविर्सेस के विरुद्ध चल रही जांच में गड़बड़ी के कई सबूत मिले हैं। यह खुलासा हुआ है कि गुजरात के जिस सम्मान फाउंडेशन का अनुभव प्रमाण-पत्र 108 की निविदा में लगाया गया,दरअसल वह निविदा शर्तों को पूरा नहीं करता है। छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने 100 एंबुलेंस (एडवांस लाइफ सपोर्टिंग सिस्टम) के संचालन का अनुभव प्रमाण-पत्र मांगा था। मगर, सम्मान फाउंडेशन के पास सिर्फ 44 एंबुलेंस के संचालन का अनुभव था।
राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के दस्तावेज इसे प्रमाणित भी कर रहे हैं, जो उन्होंने 29 फरवरी 2020 को संचालक स्वास्थ्य सेवाएं छत्तीसगढ़ को भेजे हैं। इधर 102 महतारी एक्सप्रेस संचालन के लिए निकाली गई निविदा में एकमात्र कंपनी के शामिल होने से अब दोबारा निविदा निकाली जाएगी।स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ उच्च सूत्रों की मानें तो जांच कमेटी के पास जय अम्बे इमरजेंसी सर्विसेस के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा करने के पुख्ता प्रमाण हैं। चर्चा तो अनुबंध समाप्त करने को लेकर भी हो रही है।अफसर भी आएंगे घेरे में 108 की निविदा और जय अम्बे कंपनी को जारी हुए वर्कऑर्डर में सामने आ रही गड़बडिय़ों से विभागीय अफसर भी सवालों के घेरे में हैं। वे जिन्होंने निविदा की नियम-शर्तें तय की, उन्हें बदला और वर्क-ऑर्डर जारी किया था। इनमें एक आईएएस अफसर का नाम भी सामने आ रहा है।
पत्रिका ने उठाया था मुद्दा'- पत्रिकाÓ ने सबसे पहले 25 जनवरी को गड़बडिय़ों को उजागर किया था। बताया था कि कंपनी ने वार्षिक टर्न ओवर के जो दस्तावेज पेश किए वे कंपनी की दूसरी फर्मों के थे। जिनका मुख्य काम व्यवसाय कोयला परिवहन है। गड़बडिय़ों की शिकायत पहले अफसरों को की गई, मगर इस प्रकरण को दबाने की कोशिश की गई। शिकायतकर्ता स्वास्थ्य टीएस सिंहदेव से मिले। मंत्री ने संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए थे। ईओडब्ल्यू में भी इस मामले की शिकायत हुई है। गौरतलब है कि कंपनी को 191 करोड़ रुपए में वर्कऑर्डर मिला है।
102 की निविदा में आई एक ही कंपनी-गर्भवतियों को अस्पताल लाने ले-जाने वाली मुफ्त एंबुलेंस सेवा 102 महतारी एक्सप्रेस का संचालन के लिए निकाली गई निविदा में एक कंपनी ही आई। नियमों के तहत कम से कम तीन निविदाकारों का होना जरूरी है, इसलिए इस निविदा को र² कर दिया गया है। अब नए सिरे से निविदा प्रक्रिया होगी। गौरतलब है कि 2011 से चल रही इस सेवा की सभी 300 एंबुलेंस आउटडेटेड हो चुकी हैं। इनके संचालन में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रख-रखाव का खर्च भी बढ़ता जा रहा है, कई एंबुलेंस तो कबाड़ हो चुकी हैं। जीवीके-ईएमआरआई इसका संचालन कर रही है, जिसका अनुबंध 2018 में समाप्त हो चुका है। मगर, नई कंपनी तय न होने की वजह से ही जीवीके को सेवा जारी रखने के निर्देश हैं।
जय अम्बे कंपनी के विरुद्ध जांच जारी है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, कुछ भी नहीं कहा जा सकता। हां, 102 के लिए दोबारा निविदा जारी की जाएगी।नीरज बंसोड़, संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं