
रायपुर@राहुल जैन। Rahul Gandhi Bastar Visit: बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के बाद बदलते राजनीतिक और सामाजिक माहौल के बीच कांग्रेस अब राहुल गांधी को बस्तर लाने की तैयारी में जुट गई है। पार्टी की योजना जल-जंगल-जमीन से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखकर एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने की है। इसके साथ ही आदिवासी समाज की समस्याओं, वनाधिकार, विस्थापन, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों की जमीनी जानकारी जुटाने के लिए एक विशेष समिति को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि बस्तर में सुरक्षा की स्थिति में आए बदलाव के बाद क्षेत्र की राजनीति भी नए दौर में प्रवेश कर रही है। ऐसे समय में पार्टी आदिवासी क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए विकास के साथ-साथ जल-जंगल-जमीन के पारंपरिक सवालों को प्रमुखता देना चाहती है। राहुल गांधी का संभावित दौरा इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसके जरिए कांग्रेस यूसीसी और खदानों के आवंटन जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाएगी।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित समिति बस्तर संभाग के विभिन्न इलाकों में जाकर आदिवासी समाज की प्रमुख समस्याओं की जानकारी जुटाएगी। इसमें वनाधिकार पट्टे, भूमि से जुड़े मामले, विस्थापन और पुनर्वास, स्थानीय रोजगार, लघु वनोपज, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विषय शामिल किए जा सकते हैं।
समिति की रिपोर्ट को राहुल गांधी के कार्यक्रम में प्रस्तुत करने की तैयारी है। कांग्रेस का फोकस केवल राजनीतिक सभा तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय लोगों से संवाद करने और उनकी समस्याओं को सीधे राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने पर होगा। पार्टी की कोशिश है कि कार्यक्रम में आदिवासी प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और प्रभावित परिवारों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
बस्तर में लंबे समय तक राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा नक्सलवाद और सुरक्षा रहा है। अब सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और नक्सली प्रभाव वाले इलाकों में प्रशासनिक पहुंच बढ़ने के साथ राजनीतिक दलों के सामने नए सवाल उभर रहे हैं। कांग्रेस इसी बदले हुए परिदृश्य में आदिवासी अधिकार और विकास को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने की तैयारी कर रही है।
बस्तर में पहली बार राजनीतिक दलों के लिए सुरक्षा से इतर स्थानीय विकास और आदिवासी अधिकार प्रमुख चुनावी मुद्दे बन सकते हैं। कांग्रेस लंबे समय से आदिवासी राजनीति में जल-जंगल-जमीन को महत्वपूर्ण मुद्दा बनाती रही है। विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन कांग्रेस का यह कदम संगठन को पहले से सक्रिय करने की रणनीति का संकेत माना जा रहा है।
बस्तर की सीटें कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रही हैं और पार्टी यहां अपना खोया जनाधार वापस हासिल करना चाहती है। ऐसे में राहुल गांधी का संभावित बस्तर दौरा पार्टी के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।