पापा मेरे लिए सबसे बड़े प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने हर कदम पर मुझे प्रोत्साहित किया है। उनका सपना भी था कि मैं आईपीएस बनूं। मैं बचपन से ही उनके प्रोफेशन से प्रभावित थी। जब मैं 9वीं क्लास में थी, तभी सोच लिया था कि मुझे आईपीएस अधिकारी बनना है और इसकी तैयारी में दिन-रात जुट गई।
कभी-कभी पापा के साथ उनके कार्यस्थल पर भी जाती थी। यह बात रायपुर जीआरपी की एसपी पारुल माथुर ने अपने पापा रिटायर्ड डायरेक्टर (नेशनल पुलिस एकेडमी) राजीव माथुर के साथ उनके कार्य के अनुभव को 'पत्रिका' के 'बिटिया एट वर्क' की टीम के साथ शेयर किया। उन्होंने कहा कि उनके काम को देखकर समझ पाई थी कि अगर पब्लिक से सीधे जुडऩा है या समाज के लिए कुछ करना है तो वो इसी प्रोफेशन में कर सकते हैं।
पारुल सहित तीन बहनें हैं और तीनों इंडिपेंडेंट हैं। वे कहती हैं कि पापा चाहते थे कि हम तीनों बहनें आत्मनिर्भर बनें। पापा भी चाहते थे कि मैं आईपीएस बनूं और उनका सपना पूरा हुआ तो मुझे बहुत खुशी हुई। बड़ी बहन अमरीका में जॉब करती हैं और छोटी बहन डॉक्टर है।
वे कहती हैं कि रेलवे में महिला सुरक्षा के लिए वे हमेशा ही तत्पर रहती हैं। इसके लिए पापा से भी मार्गदर्शन मिलता रहता है। अभी भी रेलवे में महिलाएं असुरक्षित महसूस करती हैं। मेरी कोशिश रहती है कि यात्रियों को कोई भी परेशानी हो तो तुरंत उनकी मदद की जाए।
बचपन से ही लड़कियों को वर्दी में देखकर अच्छा लगता था और उसे देखकर गजब का आकर्षण होता था। मेरी मम्मी राजकुमार कॉलेज में टीचर थीं, लेकिन मुझे पापा का प्रोफेशन अच्छा लगता था। कभी-कभी पापा की वर्दी भी पहन लेती थी। मुझे पहली महिला आईपीएस किरण बेदी भी काफी प्रभावित करती थीं।