पूरे देश को झकझोर देने वाले झीरम घाटी कांड की रमन सरकार ने CBI जांच कराने की घोषणा की है। विधानसभा में प्रभारी गृहमंत्री अजय चंद्राकर ने कहा कि झीरम घाटी हमले की केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच करवाई जाएगी। बुधवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा(CG Assembly) में अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान गृहमंत्री अजय चंद्राकर ने यह घोषणा की। गौरतलब है कि 25 मई 2013 में माओवाद प्रभावित सुकमा के दरभा घाटी में नक्सलियों ने प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल सहित 30 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था।
25 मई 2013 को हुई थी देश को हिला देने वाली घटना
छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के लिए कांग्रेस ने बस्तर से प्रदेशव्यापी परिवर्तन यात्रा निकाली थी। जब परिवर्तन यात्रा से कांग्रेस के नेता लौट रहे थे, तभी नक्सलियों ने एम्बुश लगाकर दरभा के झीरम घाटी में 25 गाड़ियों में निकले 200 कांग्रेसी कार्यकर्ताओं पर 300 से अधिक माओवादियों ने हमला किया था। जिसमें पूर्व केन्द्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, नेता प्रतिपक्ष महेन्द्र कर्मा सहित 30 लोगों की मौत हो गई थी और हमले में 38 लोग घायल भी हो गए थे। हमले के बाद सरकार ने जांच आयोग का गठन किया था।
कांग्रेस ने सरकार पर लगाया था आरोप
कांग्रेस ने परिवर्तन यात्रा में सुरक्षा में चूक का रमन सरकार पर आरोप लगाया था कि सरकार ने विपक्ष की अग्रिम पंक्ति के नेताओं को समाप्त करने के लिए यह चाल चली थी। इसी बीच कांग्रेस के अंदरूनी हलकों में भी यह कानाफूसी हुई थी कि इस पूरे मामले में अजीत जोगी का हाथ है। हालांकि जोगी ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया था।
NIA जांच से कांग्रेस नहीं थी खुश
कांग्रेस के विरोध के बाद घटना का राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही थी। लेकिन जांच की धीमी गति से कांग्रेस असंतुष्ट थी। वह लगातार मामले को सीबीआई को सौंपने की मांग कर रही थी। 22 सितंबर, 2015 को कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी।
घटना के तीन साल बाद भी नहीं उठा पर्दा
हालांकि सरकार ने घटना की जांच एनआईए को सौंपी थी, लेकिन एनआईए तीन साल में किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। इस बीच घटना में शामिल कई नक्सलियों ने सरेंडर किया और कई पकड़े भी गए, लेकिन एनआईए उनसे कुछ भी उगलवा नहीं पाई।
गृहमंत्री ने की सीबीआई जांच कराने की घोषणा
कांग्रेस झीरम घटना के बाद से ही मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रही थी। इसे लेकर उसने कई बार प्रदर्शन किए और विधानसभा में भी अपनी मांग दुहराई। रमन सरकार ने झीरम मामले में सुरक्षा में चूक तो स्वीकार कर ली थी, परंतु सीबीआई जांच के लिए तैयार नहीं थी। घटना की तीसरी वर्षगांठ के पहले बुधवार को सरकार ने अचानक अपना रुख बदलते हुए सीबीआई जांच कराने की घोषणा कर दी।
10 बिंदुओ में समझें अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक नरसंहार
1.25 मई 2013 को कांग्रेस ने बस्तर से परिवर्तन रैली की शुरूआत की।
2.परिवर्तन यात्रा से लौटते समय करीब 300 नक्सलियों ने एम्बुश लगाकर दरभा घाटी के पास किया हमला।
3.नक्सलियों के हमले में पूर्व केन्द्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, नेता प्रतिपक्ष महेन्द्र कर्मा सहित 30 लोगों की मौत हो गई थी और हमले में 38 लोग घायल भी हो गए थे।
4.राज्य सरकार ने किया जांच आयोग का गठन
5.कांग्रेस ने सुरक्षा में चूक बताते हुए राज्य सरकार को बताया घटना के लिए जिम्मेदार
6.रमन सरकार और पूर्व सीएम अजीत जोगी पर भी लगा आरोप, दोनों ने सिरे से नकारा
7.एनआईए ने कांग्रेस नेता कवासी लखमा और गिरफ्तार व सरेंडर करने वाले नक्सलियों से की पूछताछ, लेकिन तीन साल बाद भी नहीं हुआ कुछ भी खुलासा।
8.कांग्रेस ने 22 सितंबर, 2015 सीबीआई जांच की मांग को लेकर राष्ट्रपति से की मुलाकात
9.प्रदेशभर में सीबीआई जांच को लेकर कांग्रेस ने किया प्रदर्शन। विधानसभा में भी कई बार उठाया मु²ा और किया हंगामा
10.16 मार्च 2016 को विधानसभा में प्रभारी गृहमंत्री अजय चंद्राकर ने की घटना की सीबीआई जांच कराने की घोषणा।